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बिना अनुमति के लगाया टावर, प्रशासन ने रोका
शहरकी भाटकड़ा कॉलोनी में बिना अनुमति के लगाए जा रहे मोबाइल टावर को प्रशासन ने रूकवा दिया है। कॉलोनीवासियों की शिकायत एसडीएम ओपी विश्नोई ने मौका मुआयना किया और निजी मोबाइल कंपनी से टावर लगाने का अनुमति पत्र मांगा, लेकिन उनके पास अनुमति पत्र नहीं था। साथ ही घनी आबादी के बीच टावर लगाया जा रहा था। जिस पर एसडीएम ने हाथोंहाथ टावर लगाने के काम को रूकवा दिया। एसडीएम ने बताया कि शहर में लगे अन्य मोबाइल टावर्स की भी जांच की जाएगी। बिना अनुमति एवं आबादी क्षेत्रों में लगाए गए टावर्स के कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
महानगरों की तर्ज पर सिरोही में भी बढ़ रहे मोबाइल ट्रैफिक के साथ मोबाइल टावर्स की संख्या भी बढ़ रही है। खास बात यह है कि आवासीय बस्तियों में टावर की सौ मीटर की परिधि में रहने वाले लोग इससे प्रभावित होते हैं। इन मोबाइल टावरों से निकलने वाली रेडिएशन से कैंसर ट्यूमर जैसी घातक बीमारियां होती हैं। साथ ही रेडिएशन के डर से पक्षी भी आबादी क्षेत्र में प्रवेश करने से डरते हैं। सघन आबादी वाले क्षेत्रों में 20 फीट से ऊंचे और एक से सात टन वजनी टावर लगाने के कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश तक नहीं हैं। प्रमुख मोबाइल कंपनियों ने सिरोही शहर समेत आबूरोड, शिवगंज, पिंडवाड़ा में दर्जन भर टावर एक मंजिला बहुमंजिला इमारतों पर लगाए हैं। इमारतों पर लगाए जाने वाले टावर से उनके गिरने का भी खतरा बना रहता है।
स्वास्थ्य पर भारी है किराए का लालच
आबादीवाले क्षेत्र में आवासीय प्लॉट मकानों की छत पर टावर सेटअप लगाने का किराया करीब पांच से दस हजार रुपए तक मिलता है। पांच से बीस वर्ष के लंबे अनुबंध के आधार पर मोबाइल कंपनियां तीन वर्ष के अंतराल में दस फीसदी किराया बढ़ाती है। मोबाइल टावर से निकलने वाली रेडिएशन से होने वाले खतरे को जानते हुए भी लोग किराए के लालच में आबादी क्षेत्रों में ही मोबाइल टावर लगवा देते हैं।
अनुमति केवल एक बार
किसीभी शहर में नेटवर्क शुरू करने से पूर्व निजी मोबाइल कंपनियां सरकारी महकमों से अनापत्ति प्रमाण पत्र केवल एक बार ही लेती है फिर हर नए टावर की केवल सूचना स्थानीय निकाय को देती है। इससे तो सरकार को राजस्व की आय हो रही है और ही नगरीय निकायों को कोई आय मिल रही है, जबकि आबादी क्षेत्र में लगे टावरों से आसपास के मकानों की सुरक्षा लोगों के स्वास्थ्य पर खतरे के बादल मंडरा रह