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श्रीकृष्ण सुदामा की मित्रता का सुनाया प्रसंग
विष्णुधर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में संत हरिशरण उपाध्याय ने कहा कि मित्रता में निस्वार्थ त्याग की भावना होती है। मित्रता में कभी अमीरी-गरीबी को नहीं देखा जाता है। यदि मित्रता के बीच यह भाव होता तो श्रीकृष्ण और सुदामा की दोस्ती कभी नहीं होती। उन्होंने कथा के दौरान श्रीकृष्ण के गुरुकुल में अध्ययन और मित्रता का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा की गोपियां श्रीकृष्ण के मथुरा से जाने के बाद वृंदावन में हर स्थान पर श्रीकृष्ण को महसूस किया करती थी। कथा में भजन कलाकारों ने आकर्षक भजन प्रस्तुत किए। भजनो पर भक्तो ने भाव विभोर होकर नृत्य किया। देर शाम तक चली कथा आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। कथा के अंत में संत ने गुरू की महिमा बताते हुए कहा की जीवन में जो भी अच्छी बातें बताएं उसे अपना गुरू मान लें। जीवन में हमेशा अच्छाइयां ग्रहण करने की आदत डालो। दूसरों की कमी बताने से जीवन में कुछ भी हासिल नहीं होता है। उन्होंने कहा कि जीवन में शांति चाहते है, तो धीरे बोले एवं कम बोले। परिवार में शांति चाहते है तो वाणी में मिठास लाओं, मीठा बोलों ताकि सब तुम्हे चाहने लगे। इस अवसर पर कलाकारों का बहुमान किया गया।
आबूरोड. विष्णु धर्मशाला में आयोजित भावगत कथा के दौरान की गई आरती में उपस्थित श्रद्धालु।