सिरोही में अपने ही ले डूबे भाजपा को
3 पंचायत समितियों में बहुमत वाली भाजपा सिर्फ पिंडवाड़ा में टीपू गरासिया को प्रधान बना पाई।
भास्करन्यूज. सिरोही
जिलापरिषद पंचायत समितियों में मिली जोरदार जीत का भाजपा अभी जश्न भी नहीं मना पाई थी कि उसके खेमे में उठे बगावत के सुरों ने सारी खुशियां काफूर कर दी। जिले की पांच पंचायत समितियों में से तीन में स्पष्ट बहुमत के बावजूद भाजपा सिर्फ एक जगह अपना प्रधान बना पाई। जबकि कांग्रेस को जिन दो पंचायत समितियों आबूरोड शिवगंज में बहुमत मिला वहां वह आसानी से अपना बोर्ड बनाने में कामयाब रही।
बगावत के बाद भाजपा को अच्छा खासा नुकसान हुआ है हालांकि पार्टी नेता जिला प्रमुख पद पर मिली जीत से खुश हैं और इस जीत कर हार चुके इस बाजी को यह कहकर टाल रहे हैं कि पार्टी कार्यवाही करेगी। जिलाप्रमुख के चुनाव में भाजपा अपनी पार्टी की पायल परसरामपुरिया को जिलाप्रमुख बनाने में कामयाब रही। रेवदर पंचायत समिति में पहली बार भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला था, फिर भी पार्टी का प्रधान नहीं बन सका। यहां निर्दलीय पूंजाराम मेघवाल प्रधान बने। सिरोही में भी भाजपा बहुमत में होने के बावजूद क्रॉस वोटिंग से निर्दलीय प्रत्याशी प्रज्ञा कंवर विजयी हो गई। तीन पंचायत समितियों में बहुमत वाली भाजपा सिर्फ पिंडवाड़ा में पार्टी प्रत्याशी टीपू गरासिया को प्रधान बना पाई। शेष|पेज15
जिलाप्रमुख चुनाव में दो नामांकन : सवेरेभाजपा से पायल परसरामपुरिया और लक्ष्मी पुरोहित ने नामांकन दाखिल किया, जबकि कांग्रेस नीलकमल चौधरी ने नामांकन भरा। दोपहर करीब एक बजे पायल परसरामपुरिया को पार्टी का सिंबल मिलने से लक्ष्मी पुरोहित का नामांकन खारिज हो गया। अपरान्ह 3 बजे से वोटिंग शुरू हुई। सबसे पहले भाजपा के 11 प्रत्याशी वोटिंग के लिए पहुंचे। इसके बाद कांग्रेस के 6 प्रत्याशी भी पहुंचे। कुछ देर बाद एक और भाजपा प्रत्याशी पहुंचा। तत्पश्चात तीन प्रत्याशियों में से पायल परसरामपुरिया भी पहुंची, लेकिन लक्ष्मी पुरोहित और गिरिजा कंवर नहीं पहुंची। काफी देर बाद यह दोनों प्रत्याशी भी पहुंची। वोटिंग के बाद घोषित परिणामों में पायल परसरामपुरिया के खाते में भाजपा के सभी 15 वोट और नीलकमल के खाते में कांग्रेस के सभी 6 वोट गए। पायल 9 वोटों से विजयी घोषित की गई।
शहर में निकाला जुलूस : सिरोही. पायल परसरामपुरिया के जिलाप्रमुख बनने पर शहर में विजय जुलूस निकाला गया। इस मौके भाजपा के पूर्व प्रवक्ता लोकेश खंडेलवाल, महामंत्री सूरजपालसिंह, दिनेश बिंदल, उपाध्यक्ष शांतिलाल पुरोहित, विजय गोटवाल, लक्ष्मण रावल, पनेसिंह, हीदाराम माली, सुरेश सगरवंशी आदि मौजूद थे।
जिलाप्रमुख बनी पायल परसरामपुरिया परिणाम सुनकर भावुक हो गई। उनकी आंखों से आंसू छलक गए। फोटो : राजू
अपने ही लोगों ने दिया धोखा
^जनताने भाजपा के पक्ष में वोटिंग कर बहुमत दिया था, लेकिन अपनी पार्टी के लोगों ने धोखा दिया। पार्टी से चुनाव जीतकर आए प्रत्याशियों ने निर्दलीय चुनाव लड़कर बगावत की है। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भाजपा के चुनाव प्रभारी से शिकायत की जाएगी। सिरोही रेवदर में पार्टी का प्रधान नहीं बनने पर खेद है। -लुंबारामचौधरी, जिलाध्यक्ष,भाजपा
शिवगंज पंचायत समिति
प्रधान:जीवारामआर्य
पार्टी:कांग्रेस
वोटमिले: 10
निकटतमप्रतिद्वंदी: प्रतापपरमार
वोटमिले: 5
पार्टी:भाजपा
क्रॉसवोटिंग : नहीं
पिंडवाड़ा पंचायत समिति
प्रधान:टीपूगरासिया
पार्टी:भाजपा
वोटमिले: 17
निकटतमप्रतिद्वंदी: शांतागरासिया
पार्टी:कांग्रेस
वोटमिले: 4
क्रॉसवोटिंग : हां, कांग्रेस से
पंचायत समिति सिरोही
प्रधान:प्रज्ञाकंवर
पार्टी:निर्दलीय
वोटमिले: 9
निकटतमप्रतिद्वंदी: प्रेमकंवर
पार्टी:भाजपा
वोटमिले: 8
क्रॉसवोटिंग : हां, भाजपा से
आबूरोड पंचायत समिति
प्रधान:लालारामगरासिया
पार्टी:कांग्रेस
वोटमिले: 9
निकटतमप्रतिद्वंदी: रूपारामगरासिया
वोटमिले: 5 पार्टी: भाजपा
क्रॉसवोटिंग : नहीं
रेवदर पंचायत समिति
प्रधान:पूंजाराम
पार्टी:निर्दलीय
वोटमिले: 13
निकटतमप्रतिद्वंदी: रणजीतकोली
पार्टी:भाजपा
वोटमिले: 8
क्रॉसवोटिंग : हां, भाजपा से
जिला परिषद सिरोही
जिलाप्रमुख: पायलपरसरामपुरिया
पार्टी: भाजपा
वोटमिले 15
निकटतम प्रतिद्वंदी : नीलकमलचौधरी
पार्टी: कांग्रेसवोटमिले : 6
क्रॉसवोटिंग : नहीं
{रेवदर पंचायत समिति की कुल 21 सीटों में से 15 सीटें भाजपा, 3 कांग्रेस और 3 निर्दलीय के खाते में गई थी। समिति गठन के बाद पहली बार यहां भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला।
{सवेरे भाजपा के रणजीत कोली ने नामांकन दाखिल किया। कुछ देर बाद पहुंचे पूंजाराम ने दो नामांकन भरे, जिसमें एक भाजपा और दूसरा निर्दलीय से था।
{पार्टी की ओर से रणजीत कोली को सिंबल मिला। इस पर पूंजाराम का पार्टी से भरा नामांकन खारिज हो गया, लेकिन पूंजाराम ने नाम वापसी के दौरान अपना पर्चा वापस नहीं लिया और निर्दलीय चुनाव लड़ा।
{परिणाम में भाजपा प्रत्याशी रणजीत कोली को 8 वोट मिले, जबकि निर्दलीय पूंजाराम को 13 वोट मिले। पूंजाराम 5 वोटों से विजयी घोषित किए गए।
{अब यदि माना जाए कि कांग्रेस के 3, निर्दलीय 3 एक खुद का वोट पूंजाराम को मिला तो भाजपा से 6 जनों ने बगावत की, लेकिन यदि माना जाए कि निर्दलीयों ने भाजपा का साथ दिया तो भाजपा से 9 जनों ने बगावत की।
{कुल सीट 17, भाजपा को मिली 14, कांग्रेस को 2 एक निर्दलीय के खाते में गई। ऐसे में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत था। जिसके तहत उसका प्रधान बनना भी तय था।
{ भाजपा की प्रत्याशी प्रेम कंवर ने दो नामांकन भाजपा से भरे। प्रज्ञा कंवर ने भी दो नामांकन भरे, जिसमें एक भाजपा और दूसरा निर्दलीय के रूप में था।
{ निर्दलीय दीपा राजगुरु ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपना पर्चा जमा कराया। मामला त्रिकोणिय हो गया।
{इसके बाद भाजपा ने प्रेम कंवर को पार्टी का सिंबल दिया। इस पर जांच में प्रज्ञा कंवर का भाजपा से भरा नामांकन खारिज हो गया, निर्दलीय दीपा राजगुरु ने अपना नामांकन ले लिया, लेकिन प्रज्ञा कंवर ने भाजपा से बगावत की और नाम वापस नहीं लिया।
{चुनाव के बाद घोषित परिणाम में निर्दलीय प्रज्ञा कंवर को 9 वोट मिले, जबकि भाजपा की प्रेम कंवर को 8 वोट मिले। इस पर प्रज्ञा कंवर एक वोट से विजयी घोषित की गई।
{कांग्रेस के दो और एक निर्दलीय ने प्रज्ञा कंवर को वोट दिया और एक उनका खुद का वोट मिला तो ऐसे में भाजपा से पांच जनों ने बगावत की। यदि निर्दलीय ने भाजपा का साथ दिया तो भी भाजपा से चार जनों ने बगावत की।
{पांच में से तीन पंचायत समितियों में से तीन में स्पष्ट बहुमत के बावजूद भाजपा का सिर्फ पिंडवाड़ा में प्रधान
{ सिरोही रेवदर में जीते बागी, वर्ष 2010 में भी बहुमत होने के बावजूद प्रधान नहीं बना पाई थी भाजपा
{ पिंडवाड़ा में भाजपा, आबूरोड और शिवगंज में कांग्रेस के बने प्रधान, क्रॉस वोटिंग से भाजपा को नुकसान