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इधर, पत्नी से ही पदभार लेंगे आबूरोड के नए प्रधान
आबूरोड में प्रधान पद पर कांग्रेस का एक बार फिर कब्जा हो गया है, लेकिन उससे भी बड़ी बात यह है कि यह पद नवनिर्वाचित प्रधान लालाराम गरासिया के घर में ही रह गया। जी हां, इसे चाहें तो परिवारवाद की राजनीति कह लें, लेकिन लालाराम गरासिया अब अपनी प|ी से ही इस पद का चार्ज लेंगे। इससे पूर्व उनकी प|ी शांतिदेवी गरासिया आबूरोड प्रधान चुनी गई थी। खुद लालाराम गरासिया दूसरी बार प्रधान बन रहे हैं। इससे पूर्व वे 1995 में प्रधान चुने गए थे। इसके बाद 1998 में विधायक भी चुने गए।
सवेरे कांग्रेस की ओर से लखमाराम की ओर से अपनी उम्मीदवारी जताने से एक बार कांग्रेस के खेमे में खलबली मच गई, लेकिन समय रहते वरिष्ठ नेताओं ने स्थिति को संभाला और लखमाराम ने अपना नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद हुए मतदान में कांग्रेस को 9 भाजपा को 5 एक मत नोटा में गया। इससे पूर्व कांग्रेस की ओर से लालाराम गरासिया, भाजपा की ओर से रूपाराम गरासिया लखमाराम ने निर्दलीय कांग्रेस प्रत्याशी के रुप में नामांकन दाखिल किया। लखमाराम के नामांकन दाखिल करते ही कांग्रेस के खेमे में हलचल तेज हो गई, लेकिन नाम वापसी के निर्धारित समय से पहले ही निर्दलीय प्रत्याशी लखमाराम ने जिला अध्यक्ष गंगाबहन गरासिया के साथ आकर नामांकन वापस ले लिया। इसके बाद हुए मतदान में कांग्रेस के लालाराम को नौ, भाजपा के रूपाराम को पांच एक सदस्य ने नोटा का उपयोग किया। इस पर प्रधान पद पर कांग्रेस के प्रत्याशी लाला राम गरासिया को विजयी घोषित किया गया। इस दौरान सदर थानाधिकारी कैलाशदान, शहर थानाधिकारी सीताराम खोजा, पूर्व विधायक कांग्रेस की जिलाध्यक्ष गंगाबेन गरासिया, तेजसिंह देवड़ा, पालिकाध्यक्ष अश्विन गर्ग, राजेश गहलोत, हाफिज खान, ऐजाज खान, सईद पठान, भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष दिनेश खंडेलवाल, परवीन राठौड़, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष दशरथसिंह देवड़ा, मुकेश कोठारी समेत दोनों की राजनीतिक दलों के समर्थक पदाधिकारी मौजूद थे।
विकास को प्राथमिकता
चुनेजाने के बाद लालाराम गरासिया ने कहा कि वे विकास को प्राथमिकता देंगे। क्षेत्र में विकास के काम पूरे करवाए जाएंगे। गरासिया का राजनीतिक अनुभव भी लंबा है। वें 1983 में उप सरपंच, 86 में सरपंच, 88 में उपप्रधान, 95 में प्रधान, 98 में विधायक और 2005 में पंचायत समिति सदस्य रह चुके हैं।
आबूरोड. लालाराम गरासिया के प्रधान निर्वाचित होने पर जश्न मनाते समर्थक।