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एक साल से अटका 500 करोड़ का निवेश, सरकार अब चेती

6 वर्ष पहले
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राज्यमें औद्योगिक निवेश के लिए सरकार अनेक लुभावनी योजनाएं ला रही है ताकि बड़े-बड़े औद्योगिक घरानों को यहां औद्योगिक इकाई की स्थापना के लिए आकर्षित किया जा सके। यकीनन इससे प्रदेश में रोजगार भी बढ़ेगा और विकास भी। खासकर उन क्षेत्रों में जहां ऐसी इकाइयां स्थापित होंगी, लेकिन इसे विभाग की कमी कह लीजिए या सरकार की अनदेखी।

करीब एक साल पहले मध्यप्रदेश की एक कंपनी वेसमेट ने आबूरोड में एक बड़ी औद्योगिक इकाई की स्थापना का प्रोजेक्ट बनाया था। कंपनी के प्रतिनिधि आबूरोड आकर भी गए। रीको एरिया में जमीन देखी अन्य सारी जानकारी जुटाई, लेकिन फिर वापस लौट गए। इस बात को एक साल हो गए और तब से अब तक किसी ने इस दिशा में कदम नहीं उठाए कि कंपनी से वापस बातचीत शुरू कर जो भी कमियां रह गई हों उन्हें दूर किया जाए। बहरहाल, चार दिन पहले ही जयपुर स्थित रीको मुख्यालय से इस संबंध में वापस हलचल शुरू हुई है।

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औरअब इस प्रोजेक्ट की जानकारी मांगी जा रही है। उम्मीद है कि शायद इस कवायद के बाद आबूरोड में निवेश की कुछ नई राहें खुलेंगी। इधर, एक अच्छी खबर यह भी है कि यहां स्थित एक बड़ी औद्योगिक इकाई में उत्पादन शुरु हो गया है जबकि दूसरी में प्लांट का काम निर्माणाधीन है।

क्या है मामला

जानकारीके अनुसार एक साल पूर्व मध्यप्रदेश से वेसमेट नामक कंपनी के प्रतिनिधियों ने शहर के रीको औद्योगिक क्षेत्र में करीब 500 करोड़ रुपए लागत की इकाई स्थापना की संभावना के उद्देश्य से आबूरोड का दौरा किया था। तब रीको अधिकारियों ने कंपनी प्रतिनिधियों को क्षेत्र में जमीन उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी दी थी, लेकिन उसके बाद बात आगे नहीं बढ़ सकी। कंपनी की तरफ से कोई जवाब आया। बताया जा रहा है कि यह कंपनी यहां पेपर इकाई लगाना चाह रही थी, लेकिन उस समय संभवत जमीन की कमी या महंगी जमीन के मुद्दे पर बात आगे नहीं बढ़ सकी। इस मामले में यदि उच्च स्तर पर खास प्रयास किए जाते तो सकारात्मक परिणाम सामने आता। इकाई स्थापित होने पर क्षेत्र के हजारों लोगों को रोजगार मिलता। वहीं सरकार को करोड़ों रुपए की आय प्राप्त होती। हालांकि, कंपनी की प्रस्तावित योजना की कार्रवाई जयपुर स्थित रीको मुख्यालय स्तर पर शुरू हुई थी।

ये हो सकता है कारण

पहलाकारण कंपनी को जितनी जमीन की आवश्यकता है उतनी रीको के पास उपलब्ध नहीं होना। दूसरा कारण जमीन की वास्तविक दर के साथ औद्योगिक क्षेत्र में उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर विकास शुल्क जोड़ने का नियम। इससे जमीन की लागत बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में बड़ी औद्योगिक इकाई लगाने को इच्छुक कंपनियों के कदम पीछे खींचने से इनकार नहीं किया जा सकता।

...इधर, 44 करोड़ की इकाई में उत्पादन शुरू

इसबीच आबूरोड के औद्योगिक क्षेत्र से एक अच्छी खबर भी आई है। यहां 55 हजार 32 वर्ग मीटर भूमि पर स्थापित 44.75 करोड़ लागत की यूआरबी इकाई में बेयरिंग निर्माण शुरू हो गया है। इकाई की उत्पादन क्षमता 2.70 टन प्रतिदिन है। कंपनी का यहां स्थित प्लांट करीब 44.75 करोड़ का है। यकीनन इससे क्षेत्र में युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। इसी प्रकार 47 हजार 807 वर्ग मीटर भूमि पर प्रस्तावित मारकप रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड का निर्माण कार्य चल रहा है। इसमें टायर रिसाइकलिंग का कार्य होगा। इसकी वार्षिक इंसटाल्स कैपेसिटी 60 हजार मैट्रिक टन है। इस कंपनी का प्लांट 19.93 करोड़ का होगा।

दी थी जमीन की जानकारी

मध्यप्रदेशसे आए कंपनी के प्रतिनिधियों ने स्थानीय रीको अधिकारियों से जमीन आदि की जानकारी मांगी थी। इस पर अधिकारियों ने ग्रोथ सेंटर-द्वितीय में उपलब्ध 78 भूखंड, जमीन की दर औद्योगिक क्षेत्र में मुहैया सुविधाओं के बारे में जानकारी दी। उस समय प्रतिनिधियों ने क्षेत्र में कोयले की उपलब्धता पेपर व्यवसाय संबंधी विषयों पर चर्चा की। इसके बाद वे लौट गए। करीब एक साल बीता चुका है कंपनी की तरफ से कोई जबाव नहीं मिला है। इसके बाद करीब चार दिन पूर्व जयपुर मुख्यालय ने स्थानीय रीको कार्यालय से कंपनी की योजना के बारे में जानकारी मांगी थी।

{ आबूरोड के औद्योगिक क्षेत्र में इकाई स्थापित करने के लिए मध्यप्रदेश की एक कंपनी ने जताई थी इच्छा, होना था 500 करोड़ का निवेश

{ कंपनी के प्रतिनिधि साल भर पहले जमीन देखकर अन्य जानकारियां लेकर वापस चले गए, सरकार ने अब दिया ध्यान

^मेरे आने से पूर्व वेसमेट कंपनी के प्रतिनिधि यहां आए थे। उस समय उन्हें उपलब्ध जमीन के बारे में जानकारी दी थी। मुझे भी कंपनी द्वारा इकाई स्थापित करने पर करीब 500 करोड़ रुपए निवेश करने की योजना की जानकारी मिली है। हालांकि, दौरे के बाद कंपनी की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है। -केडीशर्मा, वरिष्ठ क्षेत्रीय प्रबंधक, रीको, आबूरोड