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चंद्रावती में निकले महत्वपूर्ण अवशेष

6 वर्ष पहले
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ऐतिहासिकनगरी चंद्रावती में चल रहे खनन कार्य के दौरान सोमवार को कुछ महत्वपूर्ण वस्तुएं निकली। विशेषज्ञ इन्हें महत्वपूर्ण मान रहे हैं। इन वस्तुओं में एक बड़ी कोड़ी, लोहे के टुकड़ो का समूह, हड्डी, कोयला, हरे रंग का कांच, एक बहुत छोटी मूर्ति का सिर शंख के टुकड़े शामिल हैं। पी-35 ट्रेंच में मिट्टी का बैल मिला है वही लोहे के टुकड़े, मिट्टी की छोटी गेंद, पीतल के घुंघरू आदि निकले हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इनके अध्ययन और कार्बन डेटिंग के बाद ही पता लगेगा कि ये कितने वर्ष पुराने हैं। शोधार्थी जोगेंद्रसिंह ने बताया कि किले के दक्षिण पूर्व भाग में ऊपर वाली दीवार से करीब 5.25 मीटर गहराई पर बड़ी कोड़ी, हरे रंग के कांच के टुकड़े, लोहा, हड्डी, कोयला शंख के टुकड़े निकले हैं। उन्होंने बताया कि कार्बन डेटिंग के बाद ही इसकी आयु के बारे में पता लग सकेगा। पुरातत्व विभाग की ओर से उत्खनन में निकली वस्तुओं को तोलकर उस पर टैग लगाए जा रहे हैं उनकी पैकिंग की जा रही है। इसके बाद इन वस्तुओं को जांच के लिए भेजा जाएगा। प्रारूपकार सुनील सांखला शोधार्थी नारायण पालीवाल ने बताया कि उत्खनन में किले के अंदर की दीवार की संरचना दिखाई दे रही है। एन-35 ओ-35 ट्रेंच का प्लान तैयार किया जा रहा है। ओ-35 में एक मीटर चौड़ी टेपर वॉल निकली है जो तत्कालीन निर्माण कला का बेहतरीन नमूना है। जिसका प्लान तैयार किया गया है। डीडी-19 का सेक्शन बनाया गया है। जिसकी गहराई शून्य से पांच मीटर तक है। जयपुर से पुरातत्व विभाग के मुद्रा शास्त्री प्रिंस कुमार उत्पल ने चंद्रावती का अवलोकन किया। शोधार्थी रोहित मेनारिया ने बताया कि पी-35 ट्रेंच जहां सामान्य वर्ग के आवासों के होने का अनुमान है में मिट्टी का बैल निकला है। साथ ही लोहे के टुकड़े, मिट्टी की छोटी गेंद, पीतल का घुंघरू सहित अन्य वस्तुएं मिली है।

आबूरोड. चंद्रावती उत्खनन के दौरान मिले रहे अवशेषों के आधार पर नक्शा बनाते अधिकारी।