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कॉलेज में व्याख्याता का दस साल से इंतजार, अपने स्तर पर खुद ही पढ़कर पास हो रहे स्टूडेंट

5 वर्ष पहले
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सेठ मंगलचंद चौधरी कॉलेज में शिक्षा प्रबंध व्यवस्था की अनदेखी

शहरके सेठ मंगलचंद चौधरी राजकीय कॉलेज में शिक्षा प्रबंध व्यवस्था की अनदेखी की जा रही है। कॉलेज में दस वर्ष पूर्व खोले समाजशास्त्र विषय के व्याख्याता की अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में इस विषय की कक्षा लगना ही शुरू नहीं हुई।

मौजूदा समय में समाजशास्त्र के करीब 250 स्टूडेंट्स है, जो अपने स्तर पर विषय की पढ़ाई कर रहे हैं। इससे पहले जिन स्टूडेंट्स ने प्रवेश लिया, उन्होंने भी तीन साल तक तक बिना व्याख्याता के स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इतना ही नहीं, वर्तमान में कॉलेज के हालत यह है कि कॉलेज बिना प्राचार्य और उपाचार्य के चल रहा है। व्याख्याताओं के स्वीकृत 28 पदों में से 11 रिक्त है। मंत्रालयिक कर्मचारियों का टोटा है, जो कर्मचारी लेखा संबंधी कार्य नहीं जानते उन्हें यह कार्य सौंप रखा है। कॉलेज प्रशासन हर साल रिक्त पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेज रहा है। स्टूडेंट्स और छात्रसंघ नेताओं ने जनप्रतिनिधियों को व्याख्याताओं की कमी से अवगत करवाया। अब नया शिक्षा सत्र भी बीतने को है, किसी ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया। नतीजतन टीएसपी आबूरोड ब्लॉक के एकमात्र सरकारी कॉलेज के स्टूडेंट्स को बेहतर शिक्षण सुविधा उपलब्ध नहीं हो पा रही।

पूरा साल बीत गया िबना व्याख्याता के

^पूरासाल बीत गया बिना व्याख्याता के पढ़ रहे हैं। पाठ्य सामग्री संबंधी समस्या आने पर परस्पर पूछकर हल निकालते हैं। कई बार कला वर्ग के अन्य विषयों के व्याख्याता का सहयोग लेते हैं। -ज्योत्सना चौहान, छात्रा, समाजशास्त्र

पिछले दस साल से पद रिक्त है

^दससाल से समाजशास्त्र व्याख्याता का पद रिक्त है। जो काफी गंभीर विषय है। विषय खोलने के साथ तुरंत व्याख्याता नियुक्त करना चाहिए। व्याख्याता के अभाव में स्टूडेंट्स को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कॉलेज में तो अन्य विषयों के व्याख्याताओं की भी कमी है। -किरण कुमारी, छात्रा, समाजशास्त्र

रिक्त पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को कराया है अवगत

^समाजशास्त्रविषय के व्याख्याता का पद रिक्त चल रहा है। व्याख्याताओं समेत अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा है। उम्मीद है शीघ्र रिक्त पदों पर नियुक्ति होगी। -रंजना जैसवाल, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय कॉलेज, आबूरोड

वर्ष 2006-07 शुरू हुआ था समाजशास्त्र विषय

1196स्टूडेंट्स की संख्या वाले कॉलेज में वर्ष 2006-07 में स्नातक स्तर पर समाजशास्त्र विषय खोला था। उस साल शीघ्र विषय व्याख्याता नियुक्त होने की उम्मीद लगाई गई, लेकिन पूरा साल यूं ही गुजर गया। दूसरे साल व्याख्याता लगने की ज्यादा संभावना थी, उस साल भी पानी फिर गया। इस तरह उम्मीदों में दस साल गुजर गए और व्याख्याता नियुक्त नहीं हो सका। मौजूदा समय में विषय के कालांश और उनका समय निर्धारित कर रखा है। जिस व्यवस्था का कोई औचित्य नहीं रह गया है। कभी-कभार स्टूडेंट्स कक्षा में बैठकर आपस में विषय संबंधी चर्चा जरूर करते हैं।

कार्रवाई के बाद भी नियुक्ति नहीं

^हमअपने स्तर पर नोट्स बनाकर पढ़ाई कर रहे हैं। व्याख्याता लगाने को प्राचार्य से आग्रह किया तब उन्होंने इस बारे में की कार्रवाई के बारे में बताया। फिर भी व्याख्याता की नियुक्ति नहीं हुई। -किशोर माली, छात्र, समाजशास्त्र )

करीब ढाई सो स्टूडेंट्स को परेशानी

^व्याख्याताके अभाव में कक्षा नहीं लगती। आखिर पढ़ाई तो बाधित होती है। इस विषय के करीब ढाई सौ स्टूडेंट्स कॉलेज में पढ़ रहे हैं। -राकेश कुमार, छात्र, समाजशास्त्र

लिपिक कर रहा लेखाधिकारी का काम

कॉलेजमें सहायक लेखाधिकारी का पद स्वीकृत है, जो वर्ष 2004 से रिक्त है। इस कारण लेखा संबंधी कार्य लिपिक को सौंप रखा है, जिसे कॉलेज शिक्षा विभाग ने कभी लेखा संबंधी कार्यों का प्रशिक्षण नहीं दिया। प्रशिक्षण के अभाव में लेखा कार्य में कोई गड़बड़ हो जाए, तो सारी जिम्मेदारी कार्यरत लिपिक की। लेखाधिकारी के अलावा पुस्तकालयाध्यक्ष, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष प्रयोगशाला सेवक के दो में से एक पद रिक्त है। चतुर्थश्रेणी कर्मचारी 6 कार्यरत है, जबकि दो दशक पूर्व करीब 18 कार्यरत थे।

{राजनीति विज्ञान विषय में व्याख्याता का 1 पद स्वीकृत है, लेकिन दो कार्यरत है

{एबीएसटी का 2

{संस्कृत का 1

{हिंदी का 1

{गणित का 1

{भूगोल का 2

{भौतिक शास्त्र का 1

{प्राणी शास्त्र का 1

{समाज शास्त्र का 1

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