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चंद्रावती में मिले अनाज-दालों का होगा अध्ययन

5 वर्ष पहले
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शहरके निकटवर्ती परमारों की राजधानी रही पुरानगरी चंद्रावती में पुरातत्व विभाग एवं जनार्दनराय नागर विद्यापीठ उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में उत्खनन में राजकीय संग्रहणालय के पीछे स्थित किला संख्या दो पर कराया जा रहा उत्खनन कार्य प्रगति पर है। चंद्रावती में उत्खनन के दौरान निकले अनाज दालों आदि के कणों को मिट्टी से अलग किया जा रहा है। इसके बाद अनाज दालों के कणों की कार्बन डेटिंग विधि से आयु की गणना की जाएगी। साथ ही तत्कालीन परिस्थितकी तंत्र फसलों आदि का अध्ययन किया जाएगा। मुख्य किले में खनन 3.80 मीटर चौड़े विशाल प्रवेश द्वार की संरचना सामने आई है। प्रोफेसर जीवन खरकवाल ने बताया कि मुख्य किले में 3.80 मीटर चौड़ी विशाल प्रवेश द्वार की संरचना स्पष्ट हुई है। इसे आगे भी खनन कर बाहर निकाला जा रहा है। इस मुख्य दरवाजे के सामने ही बाबड़ी स्थित है। ड्राफ्ट मैन नारायण पालीवाल वरिष्ठ प्रारुपकार रजनीकांत वर्मा ने बताया कि प्लान सेक्शन की ड्राइंग तैयार की जा रही है। आज यहां पहुंचे लखनऊ बीरबल साहनी विश्वविद्यालय के अनाज विशेषज्ञ अनिल पोखरियाल ने अब तक निकाले गये नमूनों का परीक्षण करने के लिए संग्रह करना प्रारंभ किया। उन्होंने बताया कि कार्बोनाइज्ड ग्रेन, सीड्स फू्रट के कण निकाले जा रहे हैं। यह लगातार तीनों चरणों में निकले हैं। यहां से गेंहूं, जौ, मूंगदाल, बाजरा, ज्वार, तिल लीन सीड निकले है।

आबूरोड. चंद्रावती की खुदाई में मिले अनाज को मिट्टी से अलग करते विशेषज्ञ।

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