अवनी संस्कृति का सम्मान जरूरी: उपाध्याय
शहरकी विष्णु धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के तहत छठे दिन संत हरिशरण उपाध्याय ने कहा कि आधुनिकता के इस युग में हम अपनी ही संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज समाज में जो माहौल तैयार हो रहा है। उसके लिए हम सब खुद जिम्मेदार है क्योंकि हम अपनी संस्कृति का सम्मान नहीं करते। पहले माता पिता अपने बच्चों के संस्कार पर सबसे अधिक जोर देते थे, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अब माता पिता अपने बच्चों से नियंत्रण खो रहे हैं। वे तो बच्चों को भले बुरे की सीख देते हैं और ही टोकते हैं। आज टीवी या सिनेमा में जो कुछ दिखाया जा रहा है क्या हम सभी एक साथ परिवार समेत बैठकर ऐसे कार्यक्रम देख सकते हैं। इंटरनेट के माध्यम से भी ऐसी सामग्री परोसी जा रही है जिससे हमारी संस्कृति प्रदूषित हो रही है। कथा में संत ने श्रीकृष्ण की बाललीलाओं का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण अपनी बाल लीलाओं के माध्यम से हर किसी का मन मोह लेते थे। गोपिकाएं उनकी एक झलक पाने को आतुर रहती और मां यशोदा एक पल के लिए भी उन्हें आंखों से ओझल होने देती। इस अवसर पर भजनों की प्रस्तुतियां भी दी गई।
आबूरोड. भागवतकथा सुनते श्रद्धालु प्रवचन देते संत हरिशरण उपाध्याय।