कॉलेज को 20 साल से बड़ी खेल प्रतियोगिता में नहीं मिला मैडल
जहांअन्य सरकारी कॉलेजों के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में चयनित होकर कॉलेज और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं। वहीं शहर स्थित सेठ मंगलचंद चौधरी राजकीय कॉलेज खेलों मेंं काफी पिछड़ गया है। खेल सुविधाओं के अभाव पीटीआई का पद रिक्त होने के कारण कॉलेज स्टूडेंट्स को स्पोट्र्स में बेहतर सपोर्ट नहीं मिल पा रहा। नतीजतन उन्हें खेलों में अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका नहीं मिल पा रहा। वे सिर्फ अंतर कॉलेज खेल प्रतियोगिताओं तक सीमित होकर रह गए हैं। हालत यह है कि हर वर्ष होने वाली अंतर विश्वविद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता में 20 साल से केवल छात्रों की क्रिकेट टीम भेजी जा रही है, वह भी इन सालों में एक बार भी मेडल नहीं जीत सकी। टीम ने क्वार्टर और सेमिफाइनल में पहुंचते-पहुंचते घुटने टेक दिए।
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राज्यऔर राष्ट्रीय स्तर की किसी प्रतियोगिता में कॉलेज के किसी खिलाड़ी के चयन का खाता अब तक नहीं खुल सका है। खेल प्रशिक्षण में अस्थाई पीटीआई का सहारा लिया जा रहा है। खेल मैदान का जैसा विकास होना चाहिए उस तरह नहीं किया जा रहा। निर्माणाधीन इंडोर स्टेडियम पूरा नहीं बन सका। जितना हिस्सा बना है वह क्षतिग्रस्त होता जा रहा है। कॉलेज प्रशासन ने खेल गतिविधियों को सुदृढ़ बनाने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजे बजट की मांग की, लेकिन इस तरफ जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कॉलेज खेल क्षेत्र में कितने बूरे दौर से गुजर रहा है।
जुएका अड्डा बना स्टेडियम भवन
कॉलेजभवन के उत्तर में निर्माणाधीन इंडोर स्टेडियम परिसर में नवनिर्मित भवन नशे जुए का अड्डा बन गया है। शराबी भवन में शराब की बोतल छोड़ रवाना हो जाते हैं। कमरों में लगी सामग्री क्षतिग्रस्त हो गई है। भवन के कमरों पर ताले नहीं है। भवन से बीस कदम दूर खेल मैदान परिसर में बड़ी संख्या में शराब के पाउच और बोतलें बिखरी है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मैदान में दिन और रात युवकों को जुआ खेलते नजर आते हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे।
ये दे रहे निशुल्क खेल प्रशिक्षण
पीटीआईके अभाव में खेल गतिविधियां प्रभावित होता देख कॉलेज प्रशासन ने प्रयास कर खेलों में दक्ष प्रशिक्षकों से संपर्क कर खिलाडिय़ों को प्रशिक्षित करने को आग्रह किया। इस पर रेलवे स्कूल से सेवानिवृत्त पीटीआई जीएस भटनागर, रेलवे में लोका पायलट पद पर कार्यरत हरीश कुमार, खेतीलाल कंचन देवी विभिन्न खेलों में निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। इस सेवा के लिए कॉलेज प्रशासन ने उन्हें सम्मानित भी किया है।
सुविधाओं के लिए मांगा हैं सहयोग
^चारखेल प्रशिक्षक खेलों का निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं। दो दशक में हुई अंतर विश्वविद्यालय खेलकूद स्पर्धाओं में कॉलेज को मैडल तो नहीं मिला, लेकिन सेमीफाइनल तक जरूर पहुंचे है। खेल सुविधाएं बेहतर बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों और भामाशाहों से सहयोग मांगा है। पीटीआई का पद 20-22 साल से रिक्त है। फिर भी हमारे स्टूडेंट्स में अपने स्तर पर भी खेलों की तैयारी करने की काफी काबिलियत है, जिसके परिणाम दिखाई देंगे। -रंजना जैसवाल, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय कॉलेज, आबूरोड
यह है स्थिति
{वर्ष 1992 से स्थाई पीटीआई का पद रिक्त
{ सालों से बॉस्केटबॉल कोर्ट का फर्श स्टैंड क्षतिग्रस्त है
{ खेल मैदान का आधा हिस्सा झाडिय़ों से घिरा है
{ कैरम खेलने के लिए अलग से कक्ष की व्यवस्था नहीं है
{ खिलाड़ी अपने स्तर पर खेलों का अभ्यास करने को मजबूर
{ खेलों के लिए सरकारी अनुदान का अभाव होने से सुविधाएं जुटाने में दिक्कत
इन खेलों की सुविधा
कॉलेजमें क्रिकेट, बॉस्केटबॉल, बॉलीवॉल, बैंडमिंटन, कैरम, गोलाफेंक, भाला फेंक, तश्तरी फेंक खो-खो खेल की सुविधा है, जिन खेलों से हर साल करीब 550 स्टूडेंट्स जुड़ते हैं। क्रिकेट के अलावा इनमें से किसी खेल में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों को सिर्फ कॉलेज स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिल पाता है।
आबूरोड. कॉलेज के खेल मैदान में उगी झाडिय़ां।