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सियावा में मिले पाषाणकालीन औजार, सात हजार साल पहले थी आबादी

5 वर्ष पहले
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चंद्रावती के उत्खनन के साथ ही यहां मानव विकास और इतिहास के कई पन्ने खुलते जा रहे हैं। यहां शोध और उत्खनन कर रहे विशेषज्ञों शोधार्थियों ने शनिवार को आसपास के क्षेत्र का सर्वे किया तो यह क्षेत्र आधुनिक युग को पाषाण युग से जोड़ता नजर आया। वह युग जो मानव का प्रारंभिक काल माना जाता है उसके अनेक प्रमाण उन्हें यहां मिले। चंद्रावती से कुछ ही दूरी पर स्थित सियावा गांव में पाषाणकालीन युग के वे औजार पाए गए जिनका मानव उपयोग करता था। इससे पूर्व चंद्रावती के प्रथम चरण के उत्खनन के दौरान भी यहां इस युग के पत्थर निर्मित औजार मिले थे। यहां मिले इन साक्ष्यों के अनुसार आज से करीब 30 हजार साल पहले यहां मानव निवास करता था। लगातार इस प्रकार के औजार यहां मिलना इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

शोधार्थियों को यह हथियार सियावा गांव में मिले हैं। प्रोफेसर जीवन खरकवाल ने बताया कि सियावा गांव में मोहाली आइसर इंस्टीट्यूट की शोधार्थी नुपुर तिवारी शोधार्थी पूर्वा भाटिया ने पाषाण कालीन स्थलों को खोजा है। उन्होंने बताया कि इस तरह के लोगों का एक और समूह सिवरणी बनास नदी के संगम पर मावल के निकट निवास कर रहा था।

{चंद्रावती की खुदाई के दौरान शोधार्थियों ने आसपास के क्षेत्र में किया सर्वे, मिले पत्थर के औजार

{इससे पूर्व भी इस क्षेत्र में मिल चुके हैं ऐसे औजार, विशेषज्ञों के अनुसार पाषाण युग में यहां था सभ्यता का विकास

अनाज का होगा अध्ययन

लखनऊबीरबल साहनी विश्वविद्यालय के अनाज विशेषज्ञ अनिल पोखरियाल ने बताया कि कार्बोनाइज्ड ग्रेन, सीड्स फू्रट के कण निकाले जा रहे हैं। इनको परिक्षण के लिए प्रयोगशाल भेजा जायेगा। उत्खनन प्रभारी केपीसिंह, रोहित मेनारिया, जयपुर से पंहुची शोधार्थी पूजा सिरोला, दिल्ली से पहुंची शोधार्थी कोमल आदि उत्खनन में जुटे रहे। विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग के तहत फिजीकल रिसर्च प्रयोगशाला के प्रोफेसर नवीन जुआन आज चंद्रावती पहुंचे।

कैसेहैं औजार

यहांकरीब ऐसे 10-15 औजार मिले हैं। देखने पर ये सामान्य पत्थरों की तरह ही गोल और नुकीले हैं। इनका प्रयोग शिकार करने, पेड़ों की छाल, कंद, मूल तोड़ने, जमीन खोदने और सुरक्षा करने में किया जाता था।

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