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उदयपुर से आए इतिहासकारों ने किया चंद्रावती का अवलोकन
शहरके समीपवर्ती चन्द्रावती में पुरातत्व विभाग एवं जनार्दनराय नागर विद्यापीठ उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में करवाए जा रहे उत्खनन कार्य के तहत आज दिन भर उत्खनन का कार्य किया गया। आज किले के पास कराई जा रही दिवार के पास के हिस्से को खोलने के साथ ही पास के परकोटे की दीवारो की संरचना को जााने के लिए खुदाई का कार्य किया गया। गुरुवार को यहां आये उदयपुर के इतिहासकारों ने चंद्रावती का अवलोकन किया। इतिहासकार कृष्ण जुगनु प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान उदयपुर शोध अधिकारी डा राजेन्द्र नाथ पुरोहित ने बताया कि राजस्थान में आहड़ चितौड़ नगर नहीं रहे लेकिन यह नगर रहा। इसके नीचे भी नगर रहा। यहां अब तक तीन स्तर नजर रहे है लेकिन हमारा मानना है कि यह नगर स्तर का भी रहा होगा जिसका बनना बिगड़ना बार रहा होगा। उन्होंने बताया कि राजा भोज की पुस्तक में भी इसके बारे में विस्तार से वर्णन है। उन्होने बताया कि यह क्षेत्र सांमतीकिला रहा है यहां बड़े स्तर पर ईंटो का प्रयोग किया गया है।
इतिहाकारों ने बताया कि सिंधु घाटी के बाद इतनी बड़ी संख्या में निमार्ण अवशेष चंद्रावती में मिला है।
खनन के दौरान निकला पत्थर।