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चंद्रावती में निकला महंगे पत्थर का मणका, विदेशों में रहती है डिमांड
हड़प्पाकालीन सभ्यता से चला रहा है इसका चलन
भास्करन्यूज | आबूरोड
चंद्रावतीके खनन कार्य के दौरान एक अर्धबहुमूल्वान पत्थर का लाल रंग का मणका निकला है। हालांकि विशेषज्ञ इसकी कीमत तो नहीं बता पा रहे हैं, लेकिन बताया जा रहा है कि यह कीमती है और इसकी विदेशों में भी डिमांड रहती है। खास बात यह है कि इस पत्थर का चलन हड़प्पा कालीन सभ्यता से चला रहा है। इसके साथ ही बुधवार को खनन के दौरान हड्डियां, लोहे की एक जंग लगी कील और सफेद रंग का एक अन्य मणका मिला है। इस बीच जापान से आए विशेषज्ञों के एक दल ने चंद्रावती का अध्ययन कर जानकारी जुटाई। यह दल गुरुवार को भी यहां रहेगा। इसके बाद गुजरात के कुछ पुरा महत्व के स्थानों पर जाएगा। पुरातत्व विभाग के अधीक्षक विनीत गोधल ने बताया कि काफी महत्वपूर्ण वस्तुएं यहां मिली हैं जिनके माध्यम से इस नगरी के अतीत को जानने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि जो मणका मिला है। वह अर्धबहुमूल्वान श्रेणी का है। शेष|पेज17
हमलोग उस पर अध्ययन करेंगे।
अन्यमहत्वपूर्ण सामग्री भी मिली : पहलेचरण की खुदाई के दौरान भी चंद्रावती में कुछ हड्डियां मिली थी। इसके बाद कुछ दिन पूर्व भी ऐसी हड्डियां सामने आई, लेकिन बुधवार को यहां बड़ी मात्रा में हड्डियां मिली है। इसी प्रकार एक जंग लगी कील मिली है और सफेद रंग का मणका मिला है। किले के पास कराई जा रही दीवार के पास के हिस्से को खोलने के साथ ही पास के परकोटे की दीवारों की संरचना को जानने के लिए खुदाई का कार्य किया गया। बस्ती की संरचना को जाने के लिए और अधिक नीचे खुदाई की जा रही है। इस बीच यहां बीरबल साहनी पूरा रिसर्च सेंटर लखनऊ के वनस्पति शास्त्री अनिल पोखरिया दक्कन कॉलेज पूणे की एसोसिएट प्रोफेसर शाहिदा अंसारी ने अवलोकन किया। यह विशेषज्ञ यहां की सामाजिक संरचना, समाज के पारंपरिक ज्ञान, रीति रिवाज, घर बनाने की कला, वनस्पति और अन्य बातों का अध्ययन कर रहे हैं।
जापानीदल के विशेषज्ञों ने किया दौरान : चंद्रावतीमें जापानी दल ने दौरा कर जानकारी जुटाई। जनार्दन राय नागर विद्यापीठ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर खरकवाल ने बताया कि जापान से विशेषज्ञों के एक दल ने यहां आकर विभिन्न जानकारियां जुटाई। इस दल में हजमे छीया संघाई से, तोशिकी ओशिदा रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन एंड नेचर क्यातो से, हीरोफेमी तेरामरा इंटरनेशनल रिसर्च सेंटर फॉर जापानी स्टडीज तोरू किशिदा से, दोशिसर मुकिवस क्योतो से ताकेशी शीमाज प्रमुख है। ये लोग जीपीएस के माध्यम से पुरा महत्व के भवनों निर्माण की शैली पहचानने, कंप्यूटर से ग्राफिक्स बनाने और प्राचीन भाषाओं के विशेषज्ञ हैं।
गर्म करने पर बदलता है रंग
चंद्रावतीमें खनन के दौरान मिला मणका जिस पत्थर से बना है उसका नाम कार्लेलियन बीड है। यह खंभात क्षेत्र में अधिक पाया जाता है। यह बहुमूल्य है, लेकिन यहां से निकले मणके की कीमत अभी नहीं पता लग पाई है। हड़प्पा कालीन सभ्यता से इस पत्थर से बने मणकों के उपयोग के साक्ष्य मिलते रहे हैं। इन मणकों को उपयोग माला बनाने में किया जाता था। प्रारंभिक अवस्था में यह सफेद रंग का होता है और जब इसे गर्म किया जाता है तो यह लाल रंग का हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत समेत विदेशों में भी इसकी डिमांड रहती है।
आबूरोड. चंद्रावती नगरी में उत्खनन के दौरान निकले अवशेष।
आबूरोड. चंद्रावती में चल रहे उत्खनन का जापान के विशेषज्ञों ने अवलोकन किया।