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सरकारी गोदाम में ही अवधि पार हो गए सोयाबीन तेल से भरे ड्रम
गोदाम में रखा और जरूरी सामान भी हुआ कबाड़
भास्करन्यूज | आबूरोड
जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत जरूरतमंदों को मिलने वाली सुविधाओं का क्या हाल होता है इसका प्रत्यक्ष प्रमाण आबूरोड पंचायत समिति के गोदाम में बंद सोयाबीन तेल से भरे ड्रम और स्लेट के ढेर से लगाया जा सकता है। तेल के ड्रम अवधि पार हो गए। वहीं स्लेटें क्षतिग्रस्त होने से कबाड़ में तब्दील हो गई। इतना ही नहीं, इनके अलावा और भी सामान है जो वितरण के अभाव में लोगों तक नहीं पहुंच सका। नतीजतन जरूरतमंद सुविधा से वंचित रहे गए। पूरी तरह अनुपयोगी हो चुके इन सामान को अब पंचायत समिति नीलाम करेगी।
सामानकी होगी नीलामी : वर्ष1980 से पंचायत समिति में तीन दर्जन से अधिक विकास अधिकारी आए और गए। लेकिन, किसी ने गोदाम की सुध नहीं ली। रख-रखाव के अभाव में गोदाम में रखा सामान खराब हो गया। हाल में नवनियुक्त विकास अधिकारी ने गोदाम को खंगाला। उन्होंने पूरी तरह खराब हो चुके सामान को गोदाम से बाहर निकलवाया है। शेष|पेज15
शीघ्रप्रत्येक सामान की सूची बनाकर इनकी नीलामी के लिए टैंडर आमंत्रित किए जाएंगे। इससे समिति को लाखों रुपए का राजस्व मिलने की उम्मीद है।
वितरितनहीं हुई चिमनियां
चारदशक पूर्व विशेष रूप से गांवों में भोजन बनाने के लिए परंपरागत चूल्हों का उपयोग किया जाता था। उन चूल्हे से निकलने वाले धुएं के कारण महिलाओं को भोजन बनाने में खासी परेशानी होती है। समस्या से वाकिफ उस समय की सरकार ने गांवों में उन्नत चूल्हे वितरित करने का निर्णय लिया था। निर्णय के तहत पंचायत समिति स्तर पर चूल्हे और चूल्हे के धुएं की निकासी के लिए चिमनियां भिजवाई थी, लेकिन समिति के गोदाम के बाहर बाहर पड़ी दर्जनों चिमनियां यही दर्शा रही है कि कई लोग चिमनी की सुविधा से वंचित रह गए। स्पष्ट है उस समय की गृहणियां रसोईघर में चूल्हे के धुंए में घुटती रही।
तेल के ड्रम की नहीं है जानकारी
^तेलके ड्रम कब आए इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। गोदाम में रखे सामान को बाहर रखवाया है। जो सामान काम में लेने लायक है उन्हें सुरक्षित रखवाएंगे। शेष सामान को टेंडर आमंत्रित कर नीलाम किया जाएगा। -मनिहारविश्नोई, विकासअधिकारी, पंचायत समिति, आबूरोड
सवाल यह कि क्या जांच होगी
मामलेमें सवाल यह उठता है कि 35 साल पहले हुई लापरवाही की क्या जांच होगी या ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा