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साल में सात बार डेपुटेशन, अब तक निरस्त नहीं हुआ

7 वर्ष पहले
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आमेटखण्ड के ओलना खेड़ा राजकीय प्राथमिक स्कूल के एक अध्यापक को एक साल में सात बार प्रतिनियुक्ति पर एक स्कूल से दूसरे स्कूल में लगाया जा चुका है। कलेक्टर के आदेश पर जिले में प्रतिनियुक्तियां निरस्त कर सभी अध्यापकों को मूल स्कूलों में लगाने का आदेश हो चुका है, लेकिन यह अध्यापक अब तक प्रतिनियुक्ति पर दूसरे स्कूल में कार्यरत है।

राजकीय प्राथमिक स्कूल ओलना खेडा़ में 6 अगस्त 2010 से कार्यरत शिक्षक रामजीलाल को बीईईओ आमेट द्वारा 17 अगस्त 2013 को बीईईओ कार्यालय के लिए रिलीव किया था। यहां से तीसरे ही दिन बीईईओ द्वारा 20 अगस्त 2013 को बीईईओ कार्यालय उन्हें राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक स्कूल सेलागुढा के लिए प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया। सेलागुढा में 5 माह 24 दिन कार्य करने के बाद अध्यापक को एक बार फिर 13 फरवरी 2014 को देवियों की मेरडा़ स्कूल में प्रतिनियुक्ति पर भेज दिया गया। यहां दो माह 28 दिन नौकरी करने के बाद ही बीईईओ द्वारा उन्हें फिर 15 मई 2014 को सेफटिया स्कूल भेज दिया। यहां उन्होंने एक माह 22 दिन पढ़ाई करवाई, फिर बीईईओ कार्यालय से 6 जुलाई को उन्हें वाणियाखेडा़ स्कूल में लगा दिया। इस स्कूल में उन्होंने एक माह 24 दिन तक अध्यापन कराया। इसके बाद बीईईओ द्वारा फिर 31 अगस्त को उनकी प्रतिनियुक्ति कुलांची स्कूल में कर दी। उल्लेखनीय है कि 17 अगस्त 2013 को प्रथम बार बीईईओ आमेट द्वारा सेलागुढा से 13 फरवरी 2014 को स्कूल में संस्था प्रधान के होते हुए भी बीईईओ द्वारा इन्हें रिलीव किया। देवियो की मेरडा सेफटिया से संस्था प्रधानों ने मौखिक आदेश से अध्यापक को रिलीव किया।

^प्रशासनिक कारणों के चलते अध्यापक रामजीलाल को प्रतिनियुक्ति पर लगा रखा है। राजेन्द्रप्रसाद जोशी, बीईईओआमेट

^अधिकारीप्रतिनियुक्ति के नाम पर अपने चहेतों को लाभ देने में लगे हुए हैं। बार-बार प्रतिनियुक्तियां कर अध्यापक को परेशान किया जा रहा है। ऐसे अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। शीघ्र ही उच्च अधिकारियो से मिल कर जांच कराई जाएगी। वैसे भी प्रतिनियुक्तियां पूरी तरह समाप्त करने के आदेश हैं। फिर भी अधिकारी अब भी प्रतिनियुक्तियां कर रहे हैं। यह भी जांच के दायरे में है।

^अध्यापकों को जान बूझकर परेशान करने का उद्देश्य नहीं होता है। शिक्षण व्यवस्था के तहत शिक्षकों को इधर-उधर के स्कूलों में लगाया जाता है। जहां तक आमेट क