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ज्योत लाकर की स्थापना

7 वर्ष पहले
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दरीबा की सूरजबारी माता

देवगढ़ की करणी माता

रिछेड़ की आमज माता

शक्ति की आराधना, होगा गरबा रास

शक्ति(माता) की नह्वान आराधना (इस बार आठ दिन) का शारदीय नवरात्र पर्व गुरुवार को घट, खड्ग स्थापना के साथ शुरू होगा। देवी मंदिरों सहित घरों में भी अखंड ज्योत की स्थापना कर जवारे बोए जाएंगे। गरबा पांडालों में माता की प्रतिमाएं मुहूर्त के अनुसार स्थापित होगी। कहीं आठ तो कहीं नौ दिन तक हर रात श्रद्धालु माता के समक्ष गरबा, डांडिया रास करेंगे। तिथि क्षय से इस बार अष्टमी नवमी एक ही दिन मनेगी। माता की आराधना को लेकर देवी मंदिरों सहित गरबा पांडालों में बुधवार शाम तक तैयारियां पूरी की गई। देवी मंदिरों सहित गरबा पांडालों को रंगीन बल्बों, लडिय़ों चमकीली फर्रियों से सजाया है। धर्म प्रेमी महिला-पुरुषों सहित बालिकाएं भी व्रत-उपवास रखेंगी। शहर सहित हर गांव-कस्बे में गरबा नृत्य होगा। इसके लिए आयोजन मंडलियां देर शाम तक तैयारी में व्यस्त रही।

गुफा में गिरती है सूर्य की पहली किरण

मंदिरऔर मान्यता

माता का यह मंदिर रेलमगरा क्षेत्र में दरीबा से चार किमी दूर है। मंदिर पहाड़ी पर है। माता पहाड़ी के बीच गुफा में विराजमान है। परिक्रमा स्थल प्राकृतिक गुफा के बीच है। सूर्य की पहली किरण माता की प्रतिमा पर गिरती है। इसी के कारण यह मंदिर सूरजबारी माता के नाम से विख्यात हुआ। मान्यता है कि यहां पर आने वाले हर भक्त कि मन्नत पूरी होती है। मंदिर में अधिकांश पक्षाघात (लकवा), मंदबुद्धि पीड़ित रोगी आते हैं। माता की प्राकृतिक गुफा में परिक्रमा देने मात्र से रोग ठीक हो जाते हैं।

इतिहास:पुजारीहजारी लाल के अनुसार मंदिर 500 साल पुराना है। मंदिर के पास ही बड़ी पहाड़ी बनी हुई है जो दोनों तरफ से खुली हुई थी। प्राकृतिक गुफा में जाने आने के अलग-अलग रास्ते हैं। किवदंती है कि मुगल सेना ने चितौड़ पर आक्रमण किया तब सूरजबारी माता ने महाराणा उदयसिंह की रक्षा की थी।

बाईसा के लिए की थी स्थापना

मंदिरऔर मान्यता

देवगढ़ नगर में स्थित यह मंदिर अब आबादी से घिर चुका है। मंदिर में नौरतां में नौ दिन तक विशेष अनुष्ठान होते हैं। करणी माता का यह मंदिर प्राचीन मंदिर है। नवरात्रि का विसर्जन अष्टमी पर होता है। नवरात्रा के दिनों में अखंड जोत जलाई जाती है।

इतिहास:मंदिरका निर्माण 325 वर्ष पूर्व देवगढ़ रियासत के राव ने करवा