पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • रात को बढ़ी पशु मेले की रंगत

रात को बढ़ी पशु मेले की रंगत

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
आमेट| नगरमें केलवा रोड पर चल रहे पशु मेले में तीसरी रात शनिवार को नगर सहित ग्रामीणों की भीड़ उमड़ पड़ी। मेले में दोपहर को ग्रामीणों ने खरीदारी का तो रात को मनोरंजन के साधनों का जमकर लुत्फ उठाया।

रंगमंच पर शनिवार रात को न्यू राजस्थानी म्युजिकल ग्रुप भीलवाड़ा, मनोज एंड रिया पार्टी नई दिल्ली के गायक कलाकार अर्जुन राणा, सोनू सहित कलाकारों ने कई प्रस्तुतियां दी। भजन संध्या की शुरुआत गणपति वंदना से हुई। जीयो म्हारो श्याम धनी जी मावे बेटी जाटणी थाली भर ने लाई रे खिचड़ो ऊपर घी की बाटकी... गीत पर नृत्य को लोगों ने सराहा।

इसके बाद घूमा दे म्हारा बालाजी घमर घमर घोटो..., रंग लाजोनी माने जाणो, जाणो रे रुणुजा रे धाम..., मनड़े रो मोयो भीलणी रंगीली..., ओलियो डी घनी आवे भवानी थ्हारी ओलियो आवे... गीतों पर नृत्य किया। नृत्य को कलाकारों ने सराहा। नगर पालिका के चेयरमैन कैलाश मेवाड़ा, उप चेयरमैन रतनसिंह राठौड़, अनिल महात्मा, शैतानसिंह, प्रदीपसिंह, पंकज जांगिड़, प्रकाश पालीवाल सहित बड़ी संख्या में नगर ग्रामीण उपस्थित थे।

मनिहारी सामान की जमकर खरीदारी

मेलेमें तीसरे दिन मनिहारी सहित घरेलू उपयोग में काम आने वाले सामान की जमकर खरीदारी हुई। महिलाओं युवतियों ने चूडिय़ां, कंगन, नकली चोटी, हार, काजल, बिंदिया, कांच की जमकर खरीदारी की। पशुओं के शृंगार प्रसाधन के सामान, देवी-देवताओं के पोस्टर, लोहे की पेटियां भी खूब बिकी। शाम ढलते ही मेले में नगरवासियों की आवक शुरू हो गई। रात आठ बजे तक मेला परिसर खचाखच हो गया। चकरी, डोलर, मौत का कुआं सहित मनोरंजन के साधनों में युवक-युवतियों की कतार रही। मेले में मनिहारी, ऊनी कपड़ों, लोहे की पेटियां, बक्सों सहित कई दुकानें लगी है।

सातसौ पशुओं का प्रवेश, 300 बिके : मेलेमें सात सौ पशुओं का प्रवेश हुआ है, इसमें से रविवार शाम तक 300 पशुओं की बिक्री हो चुकी है। मेले में गाय, भैंस, बैल की नस्लें बिक्री के लिए लाई जाती है। पिछले साल के मुकाबले इस बार मेले में पशुओं की आवक कम हुई है।

ग्रामीण पैदल ही मेलास्थल तक पहुंचे

इसबार अच्छी बारिश से मेले में खरीदारी का जोर है। व्यापारियों का कहना है कि तीसरे दिन खरीदारी ने जोर पकड़ा। हर वर्ग के लोगों ने कुछ कुछ खरीदा। दुकानदारों ने मोल-भाव ज्यादा नहीं कर माल बेचने का रुझान दिखाया। ग्रामीण वाहनों में तो नगर के लोग पैदल