- Hindi News
- यूरिया की किल्लत, प्रत्येक किसान को मिल रहे हैं दो थैले
यूरिया की किल्लत, प्रत्येक किसान को मिल रहे हैं दो थैले
क्षेत्रमेंयूरिया खाद के लिए पिछले करीब एक पखवाड़ से किसानों में हाहाकार मचा है, लगातार यूरिया खाद का इंतजार कर रहे किसानों का हुजूम सोमवार को धानमंडी में उमड़ पड़ा। यूरिया खाद के डीलर प्रकाश और सतीश ब्रदर्स पर खाद लेने के लिए किसानों की लंबी लाइनें लग गईं। कृषि विभाग द्वारा किसानों को पानी की पर्ची के आधार पर खाद वितरण के लिए पर्चियां बांट कर यूरिया खाद बंटवाई गर्इ। कृषि विभाग की सहायक कृषि अधिकारी विजयलक्ष्मी पूनियां और सुपरवाइजर देव कुमार ने किसानों को इन पर्चियों का वितरण किया, तो वहीं एक अन्य टीम द्वारा दूसरी फर्म पर किसानों को पर्चियां बांटी। कृषि विभाग द्वारा सोमवार को दोपहर तक लगभग 1200 बैग खाद की पर्चियां किसानों को वितरित की गईं। हजारों किसान अभी भी धान मंडी में खाद प्राप्त करने के लिए लंबी लाइनों में लगे अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि बिना पानी के खाद काम नहीं आती, ऐसे में नहरों में पानी आने के कारण खाद की महत्वपूर्ण जरूरत है। कृषि विभाग के सहायक निदेशक पृथ्वीराज ने बताया कि सोमवार को अनूपगढ़ की दो फर्मों पर लगभग सात हजार बैग खाद आर्इ है तथा शीघ्र ही और खाद भी आएगी। आवंटन के हिसाब से समस्त स्थानों पर यूरिया खाद पहुंच रही है। इसके अलावा इफको खाद का रैंक भी संभवत शीघ्र ही पहुंच जाएगा। खाद की उपलब्धता को लेकर उच्चाधिकारियों से बराबर संपर्क किया है तथा खाद की कमी नहीं आने दी जाएगी। व्यापार मंडल अध्यक्ष बूलचंद चुघ ने बताया कि सरसों और गेहूं की फसलों के उत्पादन के हिसाब से यूरिया खाद की भारी कमी नजर रही है। अभी 20 हजार बैग की और आवश्यकता है, उन्होंने कहा कि यूरिया खाद के लिए किसान वर्तमान में संकट की स्थिति का सामना कर रहे हैं।
किसानोंने किया एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन
घड़साना.क्षेत्रमें किसानों के सामने इस समय यूरिया खाद की किल्लत एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सोमवार सुबह किसान धानमंडी स्थित खाद विक्रेता की दुकान के समक्ष खाद लेने पहुंच गए। काफी इंतजार के बाद किसानों का सब्र टूट गया तथा लगभग तीन बजे एसडीएम कार्यालय पहुंचे। कृषि उपज मंडी समिति चेयरमैन सत्यप्रकाश सिहाग राजू जाट के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने तहसीलदार को बताया कि वर्तमान में अनूपगढ़ शाखा में सिंचाई पानी चल रहा है। जबकि किसानो को खाद के लिए भटकना पड़ता है। इसके बावजूद मंडी