अस्पताल में डॉक्टर की कमी, मरीज परेशान
कस्बेके प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। केंद्र पर द्वितीय चिकित्सा स्टाफ मरीजों को उपचार परामर्श देते हैं।
गंभीर बीमािरयों के चलते द्वितीय स्टाफ बिना डॉक्टर परामर्श के अन्य डॉक्टर को दिखाने का परामर्श देने को मजबूर है। यहां पोस्टेड डॉक्टर हेमंत नागर दो वर्ष से प्रतिनियुक्ति पर अटरू लगे हुए हैं। बीच में दो माह तक डॉ. विनोद नागर की प्रतिनियुक्ति पर यहां चिकित्सा सेवा मिली, लेकिन उनका पीजी में चयन होने के बाद अस्पताल में फिर से डॉक्टर का अभाव है। यहां आयुष चिकित्सा की पोस्ट पर डॉक्टर मिथलेश जैन कार्यरत है। यह आयुष होने के बावजूद मरीजों के आग्रह पर एलोपेथिक ट्रीटमेंट लिखने को मजबूर हैं। साथ ही अपने पास चिकित्सा अधिकारी प्रभारी का चार्ज होना फील्ड ही अपने पास चिकित्सा अधिकारी प्रभारी का चार्ज होना फील्ड की िजम्मेदारी के साथ-साथ मौसमी बीमारियों के चलते 100 से 150 के बीच रहने वाले आउटडोर को संभलना उनकी मजबूरी बना हुआ है। उनके भी विभागीय कार्य फील्ड में निरीक्षण के दौरान अस्पताल से अनुपस्थित होने पर सारी जिम्मेदारी द्वितीय स्टाफ की रह जाती है। डॉक्टर के अभाव में मरीजों को निजी क्लिनिकों पर जाना पड़ता है।
ग्रामीणों के साथ-साथ चिकित्सालय सोसायटी सदस्य भी यहां डॉक्टर लगाने की मांग लंबे समय से करते रहे हैं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। बीसीएमएचओ सोभागमल मीणा ने बताया कि पीएचसी के डॉक्टर हेमंत नागर को प्रतिनियुक्ति पर अटरू लगा रखा है। उसकी प्रतििनयुक्ति समाप्त कर उसे फतेहपुर लगाने की डिमांड वे उच्चाधिकारियों को कर चुके हैं।
फतेहपुर. चिकित्सक नहीं होने से अस्पताल के बाहर भटकते मरीज।