महाकालेश्वर में गूंजा मंगलपाठ
रामायण सिखाती है जीने की कला
बच्चों को सनातन संस्कार दें : रामकृष्णानंद
मुकुंदगढ़ | सेठभगवानदास सागरमल घुवालेवाला शिवालय के जीर्णोद्घार के बाद मंगलवार को शताब्दी महोत्सव शुरू हुआ। पंडित ज्ञानप्रकाश सुरोलिया के आचार्यत्व में मुख्य यजमान राजेंद्र प्रसाद ने सप|ीक पूजा की। पंचाग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर रामाकृष्णानंद महाराज ने कहा कि विश्व में भारत ही ऐसा देश है जहां मातृ शक्ति को पूजा जाता है। यहां अनुसुइया जैसी पवित्र नारियां हुई है। उन्होंने मातृ शक्ति से बच्चों को पाश्चात्य संस्कृति आधुनिकता की चकाचौंध से हटकर सनातन संस्कार देने की बात कही। आचार्य नटवरलाल जोशी ने अतिथियों का परिचय कराया। जोशी ने बताया की शताब्दी समारोह के तहत 16 फरवरी तक चलने वाले धार्मिक आयोजन में रुद्रचंडी अनुष्ठान भजन कीर्तन हुए। 14 फरवरी को मुख्य मार्गों में कलश यात्रा निकाली जाएगी। 15 फरवरी को मां जगदंबे पंचमुखी हनुमान मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा होगी तथा 16 फरवरी को भंडारे के साथ आयोजन का समापन होगा।
महामंडलेश्वर
चिड़ावा. बसंतोत्सव के शुभारंभ पर महाकालेश्वर मंदिर में मंगल पाठ करतीं महिलाएं।
मुकुंदगढ़. कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु।