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7 वर्ष पहले
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यहबांध क्षेत्र में खेती के लिए बड़े ही उपयोगी है। इन बांधों से हर वर्ष हजारों बीघा भूमि पर रबी की फसलों की सिंचाई होती है। किसानों को हर वर्ष अच्छी पैदावार हो जाती है। इतना ही नहीं बांधों के भर जाने से कुओं का जलस्तर भी बढ़ जाता है। बांधों में पानी की आवक नहीं होने से किसानों को पूरा पानी नहीं मिल पाएगा। वहीं क्षेत्र में गर्मी के मौसम में पेयजल संकट भी गहरा सकता है।

इनबांधों में पानी रह सकता है आरक्षित : जलसंसाधन विभाग के अधीन बांध मुठाणा बांध, घोड़धड़ा बांध, मगरतलाब बांध, हरिओम सागर बांध में इस बार उम्मीद से भी कम पानी की आवक होने से बांध से किसानों को सिंचाई के लिए पानी वितरण किया जाएगा। इसकी उम्मीद कम ही नजर रही है। ऐसे में इन बांधों का पानी पशुओं जानवरों के लिए आरक्षित रखा जा सकता है।

उम्मीदसे कम हुई इस बार बांधों मे पानी की आवक

^देसूरीक्षेत्र में विभाग के कुल दस बांध मौजूद है, जिसमें से दो बांध ही ओवरफ्लो हुए हैं। शेष बांधों में पानी की आवक नहीं होने से ओवरफ्लो नहीं हो पाए,जिसका मुख्य कारण अभयारण्य क्षेत्र में उम्मीद से कम बरसात होने से बांधों में पानी की आवक नहीं हो पाई है। -शंकरलालराठौड़, एईएन,जल संसाधन विभाग, बाली

कलसे एक...

इसकेबाद बीच में पड़ने वाले रविवार को छोड़ दें तो सीधे 23 और 24 को दीपावली की छुट्टी होगी। इसके चलते 30 सितंबर से ग्राहकों के लिए कामकाज बंद हो जाएगा। इससे पहले नकदी जमा कराने, पीपीएफ डिपोजिट, क्लियरिंग में जाने वाले चेक जमा कराने, एनईएफटी और आरटीजीएस के काम ग्राहक 29 सितंबर तक ही निबटा लें।

हेमावासबांध से..

हेमावाससे पेयजल के लिए खर्च हुआ 180 एमसीएफटी पानी : इसवर्ष मानसून की अच्छी बारिश से हेमावास बांध में लगभग 25 फीट पानी की आवक हुई है। बांध में आवक होने के साथ ही जलदाय विभाग ने अब तक लगभग 180 एमसीएफटी से अधिक पानी पेयजल के लिए उपयोग में ले लिया है। वर्तमान में हेमावास बांध में 24.35 फीट यानी, 1346.04 एमसीएफटी पानी है। बांध में सीपेज ज्यादा होने के कारण इस पानी का जल्द से जल्द उपयोग करना आवश्यक है।

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