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फैसला हुए चार वर्ष बीता, नहीं हुआ पानी का बंटवारा
मगरतलाबबांध में मूली नदी का 25 प्रतिशत पानी डालने का फैसला हुए चार वर्ष गुजर गए। मगर जल संसाधन विभाग की उदासीनता के कारण आज दिन तक पानी का बंटवारा नहीं हो सका है। पानी के अभाव में बांध खाली पड़ा है। इस कारण से किसानों को बांध का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। उल्लेखनीय है कि मगरतलाब गांव के पास मौजूद मगरतलाब बांध है। बांध की भराव क्षमता 14 फीट है। बांध में पानी की आवक नहीं होने से रियासतकाल से ही अभयारण्य से निकलने वाली मूली नदी के पानी से बांध को भरा जाता था। मगर 1998 में नदी के समीप स्थित गांवों के ग्रामीणों द्वारा इसका विरोध शुरू कर दिया।
इस कारण से मगरतलाब गांव के ग्रामीणों में रोष फैल गया और पानी को लेकर ग्रामीण आमने-सामने हो गए। प्रशासन ने बढ़ते विवाद को सुलझाने की भरपूर कोशिश की। इसके बावजूद कोई सहमति नहीं बन पाई और यह प्रकरण बाली एडीजे न्यायालय में चला गया। काफी वर्षों तक न्यायालय में प्रकरण चलने के बाद 12 अगस्त, 2010 को न्यायालय ने फैसला देते हुए कहा कि मूली नदी बहने वाला पानी में से 25 प्रतिशत पानी मगरतलाब बांध में देने तथा 75 प्रतिशत पानी नदी के बहाव क्षेत्र में छोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने जल संसाधन विभाग को फैसले के आधार पर पानी का बंटवारा शीघ्र ही करने कहा गया था। मगर फैसला हुए चार वर्ष गुजर गए, जल संसाधन विभाग ने न्यायालय के आदेश की आज दिन तक पालना नहीं की। ग्राम पंचायत मगरतलाब ने नदी में बंटवारा को लेकर पक्की दीवार बनाने के लिए प्रस्ताव जल संसाधन विभाग को कई बार भेज चुका है। मगर विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं, जिसका खामियाजा किसानों ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। वहीं कुओं का जलस्तर नहीं बढ़ने से ग्रामीण परेशान है।
बजट के अभाव में नहीं हो पाया जीर्णोद्घार
^मगरतलाबबांध में पानी डालने के लिए मूली नदी में बने बंटवारे की दीवार को ग्रामीणों द्वारा क्षतिग्रस्त करने के बाद इसका जीर्णोद्घार करने के लिए ग्राम पंचायत से एक लाख रुपए राशि मांगी गई थी। मगर पंचायत द्वारा राशि नहीं देने से इसका समय पर जीर्णोद्घार नहीं हो पाया। विभाग को इसके जीर्णोद्घार की स्वीकृति के लिए एक लाख रुपए का प्रस्ताव भेज दिया गया है। -शंकरलालराठौड़, एईएन,जल संसाधन विभाग, बाली
पानी का बंटवारा नह