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पेशेवर कलाकार नहीं, शहरवासी निभा रहे रामलीला का किरदार

7 वर्ष पहले
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संभवतयादेशभर में हमारे पाली की रामलीला अनोखी है। यहां रामलीला के किरदार कोई भी पेशेवर कलाकार नहीं, बल्कि वकील, सरकारी कर्मचारी, व्यापारी और स्टूडेंट्स ही निभा रहे हैं। यह सिलसिला भी कोई एक-दो साल से नहीं, 39 सालों से चला रहा है। हैरत की बात तो यह है कि रामलीला का खर्चा भी यही लोग चंदा एकत्रित कर वहन करते हैं। हालांकि इसके लिए कुछ सहयोग नगर परिषद और कुछ सहयोग उम्मेद मिल की आेर से भी किया जाता है। दिन में न्यायालय में पीड़ित पक्षों की पैरवी करने वाले वकील शाम को रामलीला में रावण की, तो कॉलेज में पढ़ने वाला विद्यार्थी राम का किरदार निभा रहा है।

इसके अलावा व्यापारी, सरकारी कर्मचारी और नौकरीपेशा लोग बखूबी अपना-अपना किरदार निभाते हैं। यही नहीं, 26 सितंबर से रामलीला मैदान में आयोजित होने वाली रामलीला को लेकर इन दिनों रिहर्सल किया जा रहा है। ऐसे में अपनी व्यस्ततम दिनचर्या में से दो घंटे का समय निकाल कर यह लोग अपने-अपने डायलॉग याद करने के साथ रामलीला का पूर्वाभ्यास कर रहे हैं। इस बार की रामलीला में काफी बदलाव के साथ नए कलाकारों को भी मौका दिया गया है। उनकी कोशिश होगी कि रामायण के एक-एक प्रसंग को त्रेतायुग मय बनाकर सभी कलाकार जीवंतता के साथ दर्शकों के समक्ष प्रस्तुत कर सकें। 26 सितंबर से 3 अक्टूबर तक होने वाले मंचन के लिए निर्देशक हरिचरण वैष्णव और सह निदेशक नरेन्द्र सारण की अगुवाई में कलाकार अपने किरदारों की संजीदगी के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

और रामलीला के साथ जुड़ी है रामलीला मैदान की कहानी

रामलीलाके मंचन के लिए पहले बांगड़ स्कूल के मैदान को उपयुक्त माना गया, लेकिन स्कूल के तत्कालीन प्रधानाध्यापक एचआर काका ने इसकी अनुमित नहीं दी। इस पर उस वक्त पाली में नियुक्त कलेक्टर बीएल शर्मा ने रामलीला मैदान को स्थाई रूप से मंचन के लिए आवंटित किया और नगर परिषद आयुक्त सरदार खुशहालसिंह ने नगर परिषद की ओर से रामलीला मंचन के अलावा बाकी सभी खर्च नगर परिषद द्वारा वहन करने का ऐलान किया। और तब से लेकर अब तक लगातार रामलीला मैदान में ही इसका सफल मंचन हो रहा है।

ये प्रसंग रहेंगे आकर्षण

मंचपूजा और गणेश वंदना से शुरू होने वाली रामलीला के पहले दिन 26 सितंबर को नारद मोह और विष्णु अभिशाप संवाद की प्रस्तुति होगी। उसके बाद रामजन्म, ताड़का वध सीता स्वयंवर, राम वनवास, केवल प्रसंग, भरत कैकेयी स