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होली पर आदिवासी गांवों में शराब बंद, गुड़ के खाटे से करेंगे मनुहार / होली पर आदिवासी गांवों में शराब बंद, गुड़ के खाटे से करेंगे मनुहार

Bali News - होलीके मांगलिक पर्व से जिले के आदिवासी अंचल में महिलाएं नई परंपरा का सूत्रपात करने जा रही हैं। होली के अवसर पर घर...

Bhaskar News Network

Mar 18, 2016, 12:22 PM IST
होली पर आदिवासी गांवों में शराब बंद, गुड़ के खाटे से करेंगे मनुहार
होलीके मांगलिक पर्व से जिले के आदिवासी अंचल में महिलाएं नई परंपरा का सूत्रपात करने जा रही हैं। होली के अवसर पर घर आने वाले मेहमानों की आवभगत अब शराब से करने के बजाय गुड़-आटा के मिश्रण से तैयार होने वाले खाटा (लपटा) से की जाएगी। साथ ही ढूंढ़ोत्सव में भी किसी भी स्थान पर शराब का सेवन नहीं होगा। बाली क्षेत्र की 13 आदिवासी बहुल ग्राम पंचायतों में होली तथा धुलंडी के दिन शराब पर पूरी तरह से प्रतिबंध रहेगा। किसी भी घर में अगर शराब का सेवन होता हुआ नजर आएगा तो महिलाएं गेर लेकर उनके घर पर नहीं जाएंगी। पूरे आदिवासी अंचल को शराब से मुक्त कराने के लिए करीब 8 महीनों से चल रही मुहिम को हर घर तक पहुंचाने के लिए महिलाओं ने इस बार शराबबंदी की जिद से क्षेत्र के युवाओं को भी इसमें शामिल कर लिया है। आदिवासी इलाके मेंं फाल्गुन महीने के आने के साथ ही गांवों में कच्ची शराब बनाने के लिए भट्टियां दहकने लगती हैं। साथ ही हाेली तथा धुलंडी के दिन तो मानो समूचा इलाका शराब के नशे में चूर रहता है। शेष| पेज 15



यहांतक कि धुलंडी के दिन अपने घर पर आने वाले हर व्यक्ति की मनुहार भी शराब के प्याले से ही की जाती है। आदिवासी परिवारों में यह परंपरा लंबे समय से चल रही है। इस क्षेत्र में 8 महीने पहले आदिवासी महिलाओं ने शराबबंदी को लेकर अभियान छेड़ा था। अभियान के तहत गांव-ढाणियों के पहाड़ी क्षेत्र में बनने वाली कच्ची शराब की भट्टियोंं को तोड़ा था। इसके बाद आदिवासियों ने अवैध शराब निर्माण से मानो तौबा कर ली थी। अब महिलाएं शराबबंदी को सामाजिक एवं आर्थिक बदलाव से जोड़ते हुए होली से नई परंपरा शुरू कर रही हैं। इसको लेकर शराबबंदी आंदोलन का नेतृत्व कर रही बाबली देवी की अगुवाई में 35 गांवों में बैठक भी हो चुकी है।

महिलाओं की जिद के आगे छोड़ी 2913 आदिवासियों ने शराब

महिलाओंकी तरफ से शराबबंदी के खिलाफ शुरू की गई मुहिम का ही यह असर है कि अब गांवों में कच्ची शराब बनाने के लिए भट्टियां नहीं चलती। इस क्षेत्र में सक्रिय महिला समूहों के आग्रह पर 2913 आदिवासी लोगों ने पूरी तरह से शराब छोड़ी है। शराब छुड़ाने के लिए महिलाओं को हालांकि कुछ दिनों तक तो संघर्ष करना पड़ा, मगर शराब छोड़ चुके लोग भी उनकी मुहिम में साथ दे रहे हैं।

2. होली-ढूंढोत्सव पर किसी भी घर में अगर शराब का सेवन होता हुआ नजर आया तो महिलाएं गेर लेकर उनके घर नहीं जाएंगी, ना ही मांगलिक गीत गाएंगी

1. घर आने वाले मेहमानों की मनुहार शराब की बजाय गुड़-आटा के मिश्रण से तैयार होने वाले खाटा (लपटा) से होगी।

अब नई परंपरा शुरू करेंगे

^होलीपर आदिवासी महिलाओं के साथ मिलकर नई परंपरा शुरू की जा रही है। अब तक घर आने वाले मेहमान की आवभगत शराब पिलाकर की जाती थी, मगर अब होली पर आने वाले मेहमान को गुड़ से बना हुआ खाटा परोसा जाएगा। -बाबलीदेवी, मुखिया, आदिवासी शराबबंदी मुहिम

आगे क्या : शराब दुकानों का विरोध होगा

अगलेचरण में आदिवासी महिलाएं नए वित्तीय वर्ष से इस क्षेत्र में शराब की दुकानें नहीं खोलने के खिलाफ आंदोलन शुरू करेंगी। पिछले साल ही आबकारी विभाग ने इस क्षेत्र में शराब की दो दुकानें आबंटित की है। इन दुकानों को बंद कराने के लिए जिला प्रशासन आबकारी विभाग के अधिकारियों के समक्ष गुहार की जाएगी।

होली पर पूरी तरह से शराबबंदी कराने के लिए आदिवासी महिलाएं पहुंच रही गांव-गांव।

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