राष्ट्रप्रेम की परिचायक है हिंदी भाषा
^हिंदीकाे राष्ट्र भाषा का गौरव प्राप्त है। विश्व के 150 देशों में हिंदी भाषा पढ़ी बोली जाती है। अत: हर व्यक्ति का कर्तव्य है कि राष्ट्र भाषा की उन्नति और उसका मान बढ़ाएं। हमारे देश की मातृ भाषा हिंदी है। हिंदी हमारे देश की राजभाषा है। हिंदी माथे का चंदन, करें हम हिंदी भाषा का कोटिश: वंदन। भाषा के माध्यम से ही राष्ट्र प्रेम, कर्तव्यनिष्ठा, सहिष्णुता, दायित्व बोध एवं समंवयवादिता को उजागर किया जा सकता है। हिंदी में रचित साहित्य को पढ़ा, समझा और उस पर मनन करना चाहिए।
सालगरामपरिहार, प्राध्यापक(हिंदी), राउमावि, बालोतरा
प्रतिभाएंहुई कुंठित
^हिंदीदिवस मनाने की परंपरा का निवर्हन वर्षों से कर रहे हैं, मगर हिंदी के प्रयोग के प्रति संकल्पित दृष्टिकोण का अभाव आज भी कायम है। अंग्रेजी की अधिकारिता ने हिंदी का हित नहीं किया है। वैसे हिंदी ने सदा सभी भाषाआंे शब्दों को सम्मान दिया है। हिंदी का वर्चस्व रहने से हिंदी की प्रतिभाएं कुंठित हुई है। आज अंग्रेजी के कारण हिंदी अपने लक्ष्य से भटकती लग रही है। हिंदी के वाक्य में अंग्रेजी शब्दों की भरमार आज स्टेट्स सिंबल बन गया है। इससे ऐसा लगता है कि सही हिंदी कार्य क्षेत्र, कर्म क्षेत्र और जीवन में हर प्रासंगिक अवसर पर हिंदी को अपनाने का व्रत रखें तो हिंदी दिवस को सार्थकता निश्चित है। लालचंदपुनीत, साहित्यकार
पीएमका प्रयास सराहनीय
^हिंदीदेश की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, फिर भी जो सम्मान वास्तविक रूप से इसे मिलना चाहिए। इसके लिए प्रयासरत तो बहुत है, पर अभी समय लगना है। देश के प्रधानमंत्री ने अवश्य हिंदी की गरिमा में चार चांद लगाने का प्रय| किया, जो स्तुल्य एवं अभिनंदनीय है। हिंदी दिवस हिंदी की गरिमा के लिए मनाया जाता है और इसके संदर्भ में कुछ महत्वपूर्ण निर्णय हर हिंदी दिवस पर लें और अमल में लाएं तो हिंदी का वर्चस्य स्वत: ही नजर आने लगेगा।
ललिताछीपा, अध्यापिका(रामावि ढाणी सांखला)