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हमारी संस्कृति ही विश्व संस्कृति की जननी : महंत

7 वर्ष पहले
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विश्व ओमकार आश्रम जाडन जिला पाली के महामंडलेश्वर विश्वगुरु स्वामी महेश्वरानंद महाराज शुक्रवार को मोतीसरा गांव पहुंचे। इस दौरान गर्ग ऋषि समाज मोतीसरा, राखी, खंडप, मोकलसर, समदड़ी, करमावास, बालोतरा, रमणिया, धीरा, भागवा, पोकरण सहित आसपास के श्रद्धालुओं स्थानीय ग्रामीणों की ओर से महाराज का ढोल-ढमाके गाजे-बाजे के साथ पुष्प वर्षा कर सामैया कर स्वागत किया गया।

इस दौरान स्वामी महेश्वरानंद महाराज ने ठाकुरजी मंदिर के दर्शन कर देश में खुशहाली की कामना की। मंदिर से कन्याओं महिलाओं की ओर से कलश यात्रा के साथ महिलाएं मंगल गीत गाते हुए महाराज के साथ पूरे गांव की परिक्रमा की गई। जगह-जगह पर महामंडलेश्वर का फूल-मालाओं के और पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किय गयसा। परिक्रमा के बाद महाराज ग्राम पंचायत के पास सुसज्जित पांडाल स्थल पहुंचे, जहां पर आयोजन समिति की ओर से पुष्पवर्षा कर ढोल-थाली से महाराज का स्वागत किया गया। इस अवसर पर धर्मसभा का आयोजन हुआ। धर्मसभा में महामंडलेश्वर जसराज पुरी जाडन, फूलपुरी महाराज जाडन, भजनानंद महाराज शिवगंज, वैदिक सनातन आश्रम पीठाधीश आत्मानंद महाराज, रणजीत आश्रम बालोतरा के अमृतराम महाराज, गोपेश्वर महाराज रमणानाड़ी, साध्वी सुखिया बाई बिलाड़ा, निहाल बाई केकड़ी आदि मंचासीन रहे। धर्मसभा को संबोधित करते हुए स्वामी महेश्वरानंद महाराज ने कहा कि देश की संस्कृति ही विश्व संस्कृति की जननी है। महंत परिवार में भारतीय भाषाशैली युक्त शब्द बोलने को कहा।

उन्होंने भारतीय संख्याओं को अधिकाधिक प्रयोग करने के लिए सभा में धर्मप्रेिमयों से आह्वान किया। वर्तमान पीढ़ी पाश्चात्य संस्कृति चकाचौंध में खो रही है और देश की प्राचीन संस्कृति से मुंह मोड़ रही है। ग्रामीणों को जागरुक बनकर समाज की युवा पीढ़ी को सही दिशा प्रदान कर संस्कारवान बनाना चाहिए। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म की राह पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि धर्म की राह छोड़ने वाले मनुष्य का जीवन नरक बन जाता है।

इससे पूर्व सिवाना हमीरसिंह भायल, सिवाना क्रय-विक्रय समिति के अध्यक्ष अजातशत्रुसिंह राखी, पूर्व अनुसूचित जाति आयोग अध्यक्ष गोपाराम मेघवाल, कांग्रेस युवा नेता हुकमसिंह अजीत, चंपालाल बामणिया, सरपंच भीखीदेवी माली, पूर्व सरपंच भाखरसिंह राखी रूपसिंह चौहान का आयोजन समिति की ओर से स्वागत किया गया। इस दौरान गोपाराम मेघवाल सोनाराम गर्ग