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असाधारण आत्मार्थी पुरुष थे आचार्य भिक्षु : साध्वी

7 वर्ष पहले
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असाडागांव में आचार्य महाश्रमण की विदुषी शिष्या साध्वी संघप्रभा के सानिध्य में भिक्षु चरमोत्सव कार्यक्रम आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भिक्षु अष्टक से किया गया।

कार्यक्रम में साध्वी संघप्रभा ने कहा कि आचार्य भिक्षु असाधारण आत्मार्थी पुरुष थे। उन्होंने एक सक्रिय सार्थक मनुष्य का जीवन जीया था। अपनी विलक्षण प्रतिभा से आगम मंथन कर उन्होंने जो नवनीत निकाला, वह तेरापंथ धर्मसंघ के रूप में जन-जन की आस्था का धाम बन गया। साध्वी ने प्रसंग वश विभिन्न रोमांचक दृष्टांतों घटनाओं के माध्यम से स्वामी के जीवन की अंतिम झलक भावपूर्ण स्वरों में प्रस्तुत करते हुए आचार्य भिक्षु को महामृत्युंजय वज्र संकल्पी पुरुष बताया। कार्यक्रम में साध्वी जयंतमाला ने अमर है भिक्षु तेरा नाम..., तथा साध्वी संकल्पप्रभा ने तेरापंथ पाएंगे मेरे सांवरा..., के गीतमय मधुर स्वर के साथ वातावरण को धर्ममय बना दिया।

महिला मंडल की मंत्री देवी भंसाली, कमलादेवी भंसाली, जेठीदेवी भंसाली कन्या मंडल की सदस्या ने भाषण, मुक्तक गीत आदि विधाओं में अपनी भावांजलि समर्पित की। साध्वी प्रांशुप्रभा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए आस्था के चमत्कार के कई संस्मरण प्रस्तुत किए। इस दौरान कई श्रावक-श्राविकाओं ने निर्जर के 12 भेदों की आराधना ओम भिक्षु जप रात्रि में धम्म जागरण के आयोजन में संभागी बनें। इसके अंतर्गत तेरापंथ युवक परिषद, किशोर मंडल, कन्या मंडल, ज्ञान शाला, महिला मंडल, तेरापंथ सभा साध्वीवृंद ने अपने आराध्य की स्तुति मधुरमय स्वर लहरी से की।