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गौ सेवा भारतीय संस्कृति की पहचान : मेघवाल
गौसेवा भारतीय संस्कृति की पहचान है। गाय सद्गुणों का भंडार है। इसका आर्थिक, धार्मिक वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान है। गाय की सेवा से पुण्य की प्राप्ति होती है। ये विचार सोमवार को खारापार सरपंच पीराराम मेघवाल ने जयगुरुदेव संगत के गौ संरक्षण पत्र संकलन कार्यक्रम में व्यक्त किए।
जयगुरुदेव संगत बाड़मेर के प्रवक्ता खींयाराम चौधरी ने बताया कि जय गुरुदेव संगत की ओर से संत उमाकांत महाराज के मार्गदर्शन में गौ हत्या बंद कर गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी अभियान के तहत बाड़मेर जिलेभर से सताईस हजार पत्र देश के प्रधानमंत्री प्रदेश की मुख्यमंत्री के नाम लिखे गए। उन पत्रों को मुख्यमंत्री को सौंपने के लिए प्रतिनिधि मंडल ने सताईस हजार पत्र लेकर जयपुर रवानगी की। संगत के ब्लॉक अध्यक्ष कानाराम सामरिया ने बताया कि मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री के पत्र सौंपकर गाय को राष्ट्रीय पशु बनाने की मांग के लिए प्रतिनिधि मंडल खींयाराम चौधरी पन्नालाल बाटाडू के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को जिलेभर से लिखे गए पत्र सौपेंगे। इस अवसर पर सवेरा संस्थान के समन्वयक चैलाराम हालू, मोटाराम डांगी, पेमाराम दूदवाल, डॉ. विष्णु सामरिया, पन्नालाल बाटाडू पुष्कर शर्मा सहित कई लोगों ने प्रतिनिधि मंडल को शुभकमना देकर जयपुर के लिए रवानगी की।