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नतीजों के बाद शुरू हुई नूरा कुश्ती में पिस जाए आम आदमी
पिछलेचार माह में हुए दो चुनावों में आए नतीजे अब शहर से लेकर गांव तक कई नई आशंकाओं को जन्म दे रहा है।
आशंकाएं यह कि नगर परिषद और हाल में हुए पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में कांग्रेस की जीत से जिले में भाजपा की ओर से कड़ी से कड़ी जोड़ने के किए गए वादे में यह कड़ी छूट गई है। कांग्रेस को मिली बंपर जीत के बाद अब बाड़मेर और बालोतरा समेत जिले के उन क्षेत्रों के विकास पर भी आशंकाओं के बादल मंडरा रहे हैं। आशंकाएं यह कि कांग्रेस की जीत के बाद दोनों दलों में विकास के नाम पर राजनीति शुरू नहीं हो जाए और जिले का एक बड़ा हिस्सा विकास से अछूता नहीं रह जाए।
कांग्रेस और भाजपा के बीच इन नतीजों के बाद विकास के नाम पर राजनीति की यह नूरा कुश्ती बाड़मेर और बालोतरा में शुरू हो चुकी है। इस नूरा कुश्ती में दोनों ही शहरों का आम आदमी पिस रहा है। नवंबर में जिले की दो नगर परिषदों बाड़मेर और बालोतरा में भाजपा के हार की शुरूआत हो गई थी। दोनों जगह कांग्रेस ने अपना परचम फहराया और भाजपा को बुरी तरह पटकनी दी। बाड़मेर और बालोतरा में कांग्रेस के सभापति बने। इस बात को चार माह बीत गए है ,लेकिन नया विकास कार्य तो दूर पुराने चल रहे कार्य भी रोक दिए गए है। बाड़मेर जिला मुख्यालय का तो इन दिनों लगता है भगवान ही मालिक है। शहर का एक भी कोना और गली ऐसी नहीं है जिसे बुनियादी सुविधाओं के लिहाज से आदर्श कहा जाए। चलने के लिए सड़क सही सलामत नहीं है। शहर पूरे की सड़कें उधड़ी हुई है। नालियों की व्यवस्था नहीं होने के कारण गंदा पानी इन सड़कों में हुए गड्डों में भरा रहता है। इससे शर्मनाक क्या होगा कि जिले के अधिकारियों के आवास गंदे पानी से घिर गए है। नगर परिषद में शहर के हालात को लेकर कांग्रेस और भाजपा में छींटाकशी शुरू हो गई है। कांग्रेस इस हालात के लिए भाजपा को और भाजपा कांग्रेस को जिम्मेदार ठहरा रही है। यही हालात बालोतरा शहर के है।
जिले की अधिकांश आबादी गांवों में है। हाल में हुए पंचायत चुनाव में भी ग्रामीणों ने कांग्रेस का साथ दिया। सबसे बड़े पद जिला प्रमुख से लेकर पंचायत समितियों में प्रधान तक भाजपा को यहां के मतदाताओं ने पटकनी दी। गांवों के विकास के लिए योजनाएं चलाने वाली जिला परिषद और पंचायत समितियों में भी कांग्रेस-भाजपा के बीच यही विकास के नाम पर लड़ाई सामने आने की आशंकाएं बढ़ रही है। यदि ऐसा हुआ तो आने वाले चार साल बाद यहां की जनता जो पार्टी इसके लिए ज्यादा कसूरवार होगी उसको चुनाव में माफ नहीं करेगी। दोनों शहरों समेत जिले भर के विकास के लिए दोनों दलों को दलगत राजनीति से दूर रहकर अाम आदमी की भलाई के बारे में सोचना होगा।