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अच्छे मित्र जीवन को आबाद और बुरे बर्बाद करते हैं : मुनि

7 वर्ष पहले
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मित्रोंका जिंदगी पर गहरा प्रभाव होता है। हमारा आने वाला कल इस पर निर्भर करता है कि हमारे मित्र कैसे हैंω अच्छे मित्र जिंदगी को आबाद कर सकते हैं और बुरे मित्र जिंदगी को बर्बाद भी कर सकते हैं। सोच-समझकर मित्र बनाने चाहिए। व्यसनी, कु-संस्कारी आपराधिक मानसिकता वाले लोगों को हर्गिज मित्र नहीं बनाना चाहिए। दुर्जन मित्र कभी कभी रोने के दिन लाते हैं।

राष्ट्रसंत जैनाचार्य पदमसागरसूरीश्वर महाराज के शिष्य प्रवचनकार मुनि विमलसागर महाराज ने ये विचार रविवार को स्थानीय भगवान महावीर गौशाला प्रांगण में युवा सेमिनार को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। 15 वर्ष से बड़े करीब एक हजार विद्यार्थियों को मर्मस्पर्शी मार्गदर्शन देते हुए मुनि ने कहा कि युवावस्था जीवन का अमूल्य कालखंड है। इसका पूरा-पूरा सदुपयोग कर जीवन का स्वर्णिम इतिहास लिखा जा सकता है। मुनि ने आगे कहा कि गलत आदतें जीवन को तबाही की ओर ले जाती हैं। झूठ, चोरी, व्यसन, जुआ, विश्वासघात दुराचार आदि अनेक ऐसी गलत आदतें हैं, जो मनुष्य को कभी आगे नहीं बढ़ने देती हैं। ये कुसंस्कार अपने अपने परिवार की जिंदगी में दुख अपमान लाते हैं। इन सबसे दूर रहने के लिए सज्जन मित्रों की संगति करनी चाहिए।

अच्छा साहित्य पढ़ना चाहिए और सद्विचारों का श्रवण करना चाहिए। अपराध मुक्त रहकर ही हम सफल बन सकते हैं। छोटे-छोटे अपराध भी जीवन को तबाह करने के लिए काफी होते हैं। एक छोटा सा कंकड़ पत्थर भी हमें पहाड़ से गिरा सकता है। उसी तरह छोटे-छोटे दुर्गुण भी विशाल जीवन को विनाश की ओर ले जा सकते हैं। हर विद्यार्थी को सबसे पहले एक-दो कल्याण मित्रों की खोज करनी चाहिए और हित की बातें जो भी कहें, उनकी सुननी चाहिए। मुनि ने कहा कि जीवन का पथ जटिल है, पर हार मानकर हताश नहीं होना चाहिए। आशावान बने रहना सफलता का पहला सूत्र है। नकारात्मकता ज़हर है। उससे दूर रहकर सदैव सकारात्मक ही सोचना चाहिए। सब कुछ खोने के बाद भी यदि आप सकारात्मक सोचते हैं तो मानो कि एक दिन आप सब कुछ पुन: अर्जित करने में सफल बनोगे। अपनी बातों को ठीक से समझाने के लिए मुनि ने अब्राहिम लिंकन, जॉर्ज वाशिंगटन, नारायण मूर्ति और स्टीव जॉब्स के जीवन-प्रसंगों की हृदयस्पर्शी चर्चा की। एक हजार से अधिक विद्यार्थी लगातार ढाई घंटे तक मुनि विमलसागर महाराज को सुनते रहे। मुनि पदम विमलसागर महाराज ने सरस्वती प्रार्थना से सेमिनार का श