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गलत राह के चयन से जीवन का ह्रास : मुनि

7 वर्ष पहले
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राष्ट्रसंतजैनाचार्य आचार्य पदमसागरसूरीश्वर महाराज के शिष्य प्रवचनकार मुनि विमलसागर महाराज मुनि पदमविमलसागर महाराज 10 दिन के प्रवास पर गुरुवार सवेरे नाकोड़ा तीर्थ से पदयात्रा करते हुए बालोतरा पहुंचे।

जसोल-बालोतरा तिराहे पर श्री जैन श्वेतांबर तपागच्छ मूर्तिपूजक संघ के अध्यक्ष गणपतचंद पटवारी, उपाध्यक्ष कमलेश लूणिया, ट्रस्टी मोहन कटारिया, रणजीत कवाड़, महावीर पालरेचा, कैलाश ढेलड़िया, मीठालाल जैन, बाबूलाल दांती, धनसुख दांती, गौतम कवाड़, जैन श्वेतांबर युवक महासंघ के अध्यक्ष दीपक पटवारी, पारस कवाड़ जीतू भंसाली आदि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मुनिवृंद की अगवानी की। सबसे पहले मुनियों ने विमलनाथ जैन मंदिर में पहुंचकर ससंघ चैत्य वंदना की। साध्वी कल्पगुणा आदि ने विशेष रूप से उपस्थित रहकर मुनियों का अभिवादन किया। वहां से मुनि श्रद्धालुओं के साथ मोती मार्केट के समीप स्थित मोती निवास आए। यहीं पर मुनियों का 10 दिन तक निवास रहेगा। शुक्रवार सवेरे 9 बजे भगवान महावीर गौशाला प्रांगण में मुनि विमलसागर महाराज पहली धर्मसभा को संबोधित करेंगे। गुरुवार सवेरे बालोतरा पहुंचने पर मुनि विमलसागर महाराज ने विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जागृति में जीवन है। हम जागरण का संदेश देने बालोतरा आए। अच्छे कार्याे और अच्छे विचारों में अनुरक्त रहना जागरण का प्रतीक है। जागरण में ही जीवन की सार्थकता है। समर्थवान और शक्ति संपन्न लोगों को स्वयं जागृत होना चाहिए और दूसरों को जगाने के लिए तन-मन-धन से पुरुषार्थ करना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत राह पर प्रवृति और अज्ञानता के कारण होती है। इसलिए भगवान महावीर ने प्रमाद और अज्ञान को दुखों का कारखाना कहा। गलत राह का चयन जीवन का ह्रास है। यह मृत्यु के तुल्य है। मुनि विमलसागर महाराज ने कहा कि साधू संत जगाने के लिए आते हैं। भवोभव के कुसंस्कार को तोड़ने और अपने भीतर सात्विक भावों का आरोपण करने के लिए संतों के प्रवचन होते है। संत यहां जाते हैं, बिना मौसम के भी वसंत की बहार ले आते है। हजारों-लाखों वर्षों से संतों ने ही भारत की भूमि और वहां के लोगों को सत्व-शाली बनाया है। उन्होंने कहा कि शब्दों में गजब की शक्ति होती है। प्रवचन प्रहार का काम करते हैं। मनुष्य की सोई हुई चेतना को जागृत करने के लिए प्रवचन श्रेष्ठ उपाय हैं। प्रवचन में गंवाना कुछ नहीं होता, स