बालोतरा। जिले में स्वाइन फ्लू एच 1 एन 1 वायरस गंभीर रूप लेता जा रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस बार इसका प्रकोप बढ़ गया है, लेकिन बीमारी रोकने के प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। इस बार केवल जनवरी से लेकर अब तक 12 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। डॉक्टरों ने जेनेटिक म्यूटेशन के कारण एच 1 एन 1 वायरस बदलने की आशंका जताई है।
मानसून के साथ वायरल संचरण के लिए अनुकूल मौसम लोगों की प्रतिरोधक क्षमता कम होने से जैसे गर्भवती महिला, छोटे बच्चे, कार्डियो वेस्कुलर, अस्थमा, क्रॉनिक लंग डिजीज, डायबिटीज बुजुर्गों में यह वायरस और अधिक आक्रामक अधिक लोगों को संक्रमित कर सकता है।
दवा बेअसर
डॉक्टर खुद यह स्वीकारते हैं कि स्वाइन के इलाज में काम ली जा रही टेमी फ्लू दवा इस साल प्रभावी नहीं हो रही है। जीवाणुओं ने दवा के खिलाफ अपनी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा ली है। अब तक 74 मिली ग्राम की डोज देने के बाद भी मरीजों पर असर हो रहा था, लेकिन इस बार 150 ग्राम की मात्रा भी प्रभावी नहीं हो रही है।
आज आएगी 10 हजार टेमी फ्लू टेबलेट
स्वाइनफ्लू की रोकथाम के लिए जिला स्तर पर सात टीमें गठित की गई। टीमें ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा कर रही है। सीएचसी पर टेमी फ्लू, मास्क अन्य सामग्री की सप्लाई की जा रही है। सीएमएचओ ने बताया कि जयपुर से बुधवार को दस हजार टेमी फ्लू टेबलेट की सप्लाई बाड़मेर पहुंचेगी। फिलहाल करीब साढ़े पांच हजार से अधिक टेमी फ्लू उपलब्ध है।
स्क्रीनिंग की रफ्तार धीमी, एएनएम को किया पाबंद
रेपिडरिस्पोंस टीम ने एएनएम की ओर से घर घर जाकर गर्भवती महिलाओं बच्चों की आईएलआई के लक्षणों के किए जाने वाली जांच का निरीक्षण किया गया। इस दौरान कई स्थानों पर स्क्रीनिंग की धीमी रफ्तार पाई गई। इस मामले को सीएमएचओ ने गंभीरता से लेते हुए एएनएम को पाबंद किया गया है। सभी एएनएम को स्क्रीनिंग समय पर करने के निर्देश दिए।
भर्ती होने के डेढ़ घंटे बाद महिला की आइसोलेशन वार्ड में मौत
साठ घंटे बाद भी नहीं आई है जांच रिपोर्ट,2 और मरीज भर्ती
बाड़मेर। स्वाइन फ्लू से बाड़मेर जिले की दो महिलाओं की जोधपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई। एक संदिग्ध स्वाइन फ्लू पीड़िता मरुआ प|ी शेखराराम निवासी चौखला की भर्ती करवाने के डेढ़ घंटे बाद बाड़मेर के राजकीय अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में मौत हो गई।
जोधपुर में मंगलवार को बाड़मेर शहर की मीरा देवी (45) और झिंझली निवासी 31 वर्षीय दुधी देवी की मृत्यु हुई। स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर दो नये मरीजों कोे भर्ती किया। जिले में स्वाइन फ्लू का कहर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।
जिला अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के स्वाब नमूनों की जांच रिपोर्ट 60 घंटे बाद नहीं मिल पाई है। इस स्थिति में स्वाइन फ्लू पॉजिटिव या नेगेटिव होने की पुष्टि नहीं हो रही है। मंगलवार को आइसोलेशन वार्ड में दो नए मरीज भर्ती हुए। इनके स्वाब का नमूना जांच के लिए मेडिकल कॉलेज जोधपुर भेजा गया है।
स्वाइन फ्लू का प्रकोप दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू की रोकथाम के दावे कर रहा है, दूसरी तरफ संदिग्ध मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। राजकीय अस्पताल में मंगलवार को स्वाइन फ्लू लक्षण पाए जाने पर जेतमालसिंह पुत्र जेठाराम निवासी माडपुरा बरवाला गीता प|ी दूदाराम निवासी रावतसर को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया। अस्पताल में रविवार और सोमवार को भर्ती मरीजों की जांच रिपोर्ट भी मंगलवार तक नहीं आई।
बाड़मेर बालोतरा में वार्डवार होगी स्क्रीनिंग
चिकित्साविभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. संजीव जैन ने मंगलवार को यहां बैठक में अधिकारियों को पांच दिन में बाड़मेर बालोतरा शहर में स्क्रीनिंग करने के आदेश दिए। वार्ड वार टीमें गठित करने के लिए नर्सिंग स्टूडेंट्स को शामिल करने के निर्देश दिए।
बाड़मेर. राजकीय अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीज।
...आैर इनकी यह तैयारी
सीएमएचओएस के सिंह बिष्ट ने बताया कि विभाग की ओर से रेपिड एक्शन डॉक्टरों की टीमें लगाई गई हैं। यह कोई पॉजिटिव मिलने पर तुरंत हरकत में आएगी। इसके साथ पीएचसी और सीएचसी पर मास्क और दवाएं बांटी गई हंै। पीएमओ लेवल के अस्पतालों को खर्च का बजट मिला है। जहां एक डॉक्टर ही लगा है वहां भी संदिग्ध रोगियों को अलग कमरे में देखने की व्यवस्था की गई हंै।
1. रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर स्क्रीनिंग की सुविधा नहीं है।
2. समय पर दवा उपलब्ध नहीं होना
3. अस्पतालों, मॉल, मेला, सिनेमाघरों में बिना मास्क प्रवेश
4. गंभीर मरीजों के हिसाब से वेंटीलेटर, बेड अन्य सुविधाओं का अभाव
5. अस्पतालों में भर्ती मरीजों को समय पर टीके नहीं लगना। अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ की कमी।