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जब-जब अतिक्रमण, तब-तब प्रतिक्रमण : साध्वी

7 वर्ष पहले
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निकटवर्ती असाडा गांव में आचार्य महाश्रमण की शिष्या साध्वी संघप्रभा के सानिध्य में श्रावक प्रतिक्रमण कार्यशाला का आयोजन तेरापंथ भवन में किया गया।

साध्वी ने कहा कि जैन श्रावकाचार का प्रमुख अंग प्रतिक्रमण है। जब-जब करता है व्यक्ति अतिक्रमण, तब-तब आवश्यक होता है प्रतिक्रमण। मनुष्य भूलों के संशोधन, आत्मलोचन ग्रंथी विमोचन की महत्वपूर्ण प्रतिक्रमण है। श्रमण भगवान महावीर ने श्रावक की बारह व्रतों की शुद्धि के लिए आवश्यक सूत्र का विधान किया। उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी एवं आचार्य महाप्रज्ञ ने उसी सूत्र की संस्कृत हिंदी में टीका लिखकर उसे जन भोग्य बना दिया। श्रावक प्रतिक्रमण पुस्तक के आधार पर साध्वी प्रांशुप्रभा ने प्रतिक्रमण करने के काल, समय, उच्चारण आत्मशुद्धि का माध्यम आदि उद्गार व्यक्त किए। साध्वी संकल्पप्रभा ने प्रतिक्रमण से संबंधित सुमधुर गीतिका प्रस्तुत की। धनराज भंसाली तेयुप अध्यक्ष आकाश भंसाली ने कार्यशाला का किट साध्वी को भेंट किया। कार्यशाला में लगभग 30 संभागियों ने भाग लिया। संभागियों को किट सभा, तेयुप, महिला मंडल, कन्या मंडल किशोर मंडल की ओर से दिए गए। साध्वी जयंतमाला का सहयोग भी सराहनीय रहा। कार्यशाला के प्रायोजक मेहता जवाहरलाल मुकेशकुमार भंसाली असाडा इचलकरणजी परिवार रहे।