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संस्कारों की बदौलत चरित्र व्यक्तित्व का निर्माण : काठाड़ी

7 वर्ष पहले
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क्षत्रियबनना अपने आप में मानव से महामानव बनने की साधना है। जाे उन गुणों को ग्रहण करने का तपोमयी प्रयास, जिसे हमें संस्कार कहते हैं। संस्कारों की बदौलत चरित्र व्यक्तित्व का निर्माण होता है और चरित्रवान एवं नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत व्यक्ति ही राष्ट्र एवं समाज का अमूल्य धन है। ये विचार श्री क्षत्रिय युवक संघ के चार दिवसीय संस्कार शिविर के समापन कार्यक्रम विदाई में शिविर संचालक मूलसिंह काठाड़ी ने लापुदंड़ा में 49 गांवों से आए 140 शिविरार्थियों को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।

काठाड़ी ने कहा कि इन चार दिनों में जो संस्कार एवं नैतिक मूल्याें का बीजारोपण आप में हुआ है। उसे अपने जीवन में ढाले, पुष्पित एवं पल्लवित करें, ताकि संस्कारों की सौरभ से घर-परिवार सहित राष्ट्र भी महके। उन्होंने संघ परंपरानुसार सभी शिविरार्थियांे के ललाट पर कुंकुम तिलक लगाकर विदाई दी। इस अवसर पर आयोजित सामाजिक सम्मेलन में आसपास के अनेक गांवों से मौजिज लोगों भी शामिल हुए। पंचायत समिति सदस्य एवं शिविर आयोजक धनसिंह लापुदड़ा ने सभी का स्वागत किया। सामाजिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूर्व सरपंच नखतसिंह कालेवा ने शिक्षा के महत्व पर बल दिया और शिक्षा को घर परिवार एवं समाज जागृति की मूलमंत्र कहा। पूर्व सरपंच तेजसिंह सिमरखिया ने बालिका शिक्षा पर जोर दिया। आंबसिंह मल्वा, मानसिंह कानोड़, चंदनसिंह चांदेसरा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। परेऊ महंत ओंकारभारती स्थानीय महाराज ने आशीर्वाद प्रदान किया।

इस अवसर पर रेवंतसिंह, देवीसिंह, जबरसिंह, भंवरसिंह, शंकरदान, पूर्व सरपंच वालाराम, जालमसिंह अकदड़ा, सोहनसिंह कालेवा, राणसिंह टापरा, मूलसिंह जानकी, हुकमसिंह बरना, मूलसिंह चांदेसरा, भीमसिंह, सुमेरसिंह कालेवा सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। शिविर संचालक मूलसिंह काठाड़ी ने ध्वजारोहण कर समाज राष्ट्र की मंगल कामना की।