पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

बाड़मेरसे उत्पादि

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
हर साल 72 लाख लीटर चोरी होता था क्रूड आयल,तेल परिवहन में लगे 44 में से 39 टैंकरों से होती थी चोरी,गिरोह इतना बड़ा कि सौ आरोपी नामजद, पच्चीस को पकड़ा


बाड़मेरसे उत्पादित होने वाले क्रूड ऑयल के उत्पादन में लगी केयर्न कंपनी में लगे अधिकारी ही इसको चोरी करवाकर सरकार को हर साल करोड़ों का नुकसान पहुंचा रही है। बाड़मेर पुलिस ने तेल चोर गिरोह का खुलासा किया है, जो पिछले चार सालों से बाड़मेर में सक्रिय रहने के साथ ही क्रूड तेल की चोरी में लिप्त था। टैंकर में क्रूड भरने से लेकर खाली करने तक लगे अधिकारियों, कर्मचारियों की एक चैन सामने आई है। इसमें प्रत्येक सदस्य की हिस्सेदारी फिक्स थी। पुलिस के मुताबिक हर साल बाड़मेर से 72 लाख लीटर क्रूड तेल चोरी का गोरखधंधा चल रहा था। ऐसे में चार साल में करीब 54.72 करोड़ रुपए का क्रूड तेल चोरी कर लिया गया। ऐसे में केयर्न इंडिया के तेल कुओं की सुरक्षा के दावों की पोल खुलकर सामने गई है। केयर्न की अधिकृत कंपनियां भी इस क्रूड चोरी में लिप्त पाई है। क्रूड आयल परिवहन में श्री मोहनगढ़़ कंस्ट्रक्शन कंपनी नरेंद्र रोड लाइंस के 44 टैंकर इस लगे थे, जिसमें 39 टैंकरों की भूमिका क्रूड चोरी में रही है। इन टैंकर चालकों को हिरासत लेना शुरू कर दिया है। इसके अलावा जिन फैक्ट्रियों में क्रूड खाली कर बेचा जाता था, उन फैक्ट्री मालिकों को भी नामजद कर तलाश की जा रही है। गादान रोड फैक्ट्री का मालिक भूरसिंह फरार है।

5 साल में एक बार भरा रिटर्न | खेतसिंहकी प्याऊ के पास अवैध रूप से संचालित फैक्ट्री से हर माह करोड़ों रुपए का कारोबार होता था। वाणिज्य कर विभाग के रिकार्ड के मुताबिक फर्म ने पांच साल में फर्म ने एक बार ही रिटर्न भरा। इसके बाद हर साल माल खरीदने बेचने का उल्लेख कोई नहीं किया। यानि कागजी फर्म की आड़ में संचालक की ओर से क्रूड ऑयल पुराने टायरों से प्रोडेक्ट तैयार कर कई राज्यों में सप्लाई देते थे। रास्ते में टैंकरों की हर राज्य में अलग-अलग फर्जी बिल्टी तैयार होती थी, ताकि किसी को शक नहीं हो। इसके लिए बाड़मेर से लेकर गुजरात आंधप्रदेश तक नेटवर्क बना रखा है।

पालनपुरके पास डामर प्लांट| इसीफैक्ट्री संचालक का गुजरात के पालनपुर के पास डामर प्लांट है। जिले में डामर सप्लाई का होलसेल का काम है। ऐसे में अहमदाबाद से डामर की सप्लाई डामर प्लांट पर पहुंचती है। इसके बाद डामर की सप्लाई बाड़मेर के ठेकेदारों को होती थी। बाद में फैक्ट्री संचालक ने डामर का काम बंद कर क्रूड ऑयल का कारोबार शुरू कर दिया।

पुलिस के अलावा प्रशासन भी करवा रहा जांच: कलेक्टर

कलेक्टरशिवप्रसाद मदान ने बताया कि प्रशासन भी जांच करवा रहा है। इसके लिए रसद अधिकारी अशोक सांगवा को नियुक्त किया गया है। अलग-अलग सैंपल भी लिए गए। पेट्रोलियम मंत्रालय से डिप्टी डायरेक्टर भी बाड़मेर आए है और पूरी मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इसके लिए पेट्रोलियम विभाग को भी पत्र लिखा गया है।

क्रूड चोरी में एमपीटी से लेकर उत्पादित होने वाले वेलपेड, परिवहन टैंकरों के मालिक, चालक-परिचालक सहित कई लोग गिरोह के रूप में काम कर रहे थे। जीपीएस, सर्वेयर, लोडिंग-अनलोडिंग, पेट्रोलिंग, रोड सेफ्टी टीम शामिल थी। टैंकर मालिक, चालक, हेल्पर, फैक्ट्री मालिक, उत्पादन केंद्र तथा अनलोडिंग पॉइंट, सर्वेयर, हेल्पर, एचएसई, टेक्नीशियन सहित 100 से अधिक आरोपियों को नामजद किया गया है। केयर्न में नरेंद्र रोड लाइंस एवं श्री मोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी के 44 टैंकर लगे हुए है। इसमें 17 एनआरएलएम 22 एसएमसी के है। 39 टैंकर चोरी में शामिल थे। स्पेशल टीम के पन्नाराम प्रजापत ने जीपीएस सिस्टम से 33 टैंकर जब्त करवाए।

खेतसिंह की प्याऊ के पास स्थित फैक्ट्री में 20-20 हजार लीटर के दो टैंक थे। 20 फीट ऊंची दीवार कर बंकरनुमा बनाई गई थी, ऐसे में बाहर से किसी को कोई भनक नहीं लगे। पुलिस ने टैंक से 3500 लीटर क्रूड बरामद किया। फैक्ट्री मालिक गौतम राजपुरोहित को गिरफ्तार किया है। यहां के क्रूड की जांच में सामने आया कि यह केयर्न के वेलपैड सरस्वती -1 का तेल है। इसी तरह गोदान रोड पर भूरसिंह की अवैध क्रूड फैक्ट्री थी। इसमें 8 अंडरग्राउंड टैंक थ। मूंगिया टायर को डाल अंडरग्राउंड टैंक के पाइप को छुपाया गया था ताकि भनक नहीं लगे। इस फैक्ट्री से 48 हजार लीटर क्रूड बरामद किया गया। सैंपल में क्रूड साबित हुआ है।

19 का क्रूड 7.50 रुपए लीटर खरीद 25 रुपए में बेचते थे

पुलिसके मुताबिक क्रूड ऑयल को गौतमसिंह भूरसिंह 7.50 रुपए प्रति लीटर की दर से टैंकर मालिकों से खरीदते थे और 25 रुपए में अन्य पार्टियों को बेच देते। इस तरह करीब 17.50 रुपए का मुनाफा कमाते थे। टैंकर मालिक 7.50 रुपए में 3.5 रुपए वेलपेड पर केयर्न के कर्मचारियों अधिकारियों को देते थे, जिसमें एक रुपया लीटर सर्वेयर को तथा बाकी राशि हेल्पर अन्य कर्मचारियों को बांट दी जाती थी। 4 रुपए लीटर मुनाफा टैंकर मालिक को रहता था। जीपीएस, अनलोडिंग-लोडिंग सर्वेयर को भी एक हिस्सा टैंकर मालिक देते थे।

फैक्ट्रियों में टैंकर को जल्दी खाली करने के लिए इलेक्ट्रिक फाइटर का प्रयोग किया जाता था।

जीपीएस को बाइक,कार स्कार्पियों में लगा देते थे

एमपीटीतक पहुंचने तक निश्चित स्थानों पर ही टैंकरों को रोका जा सकता है। इसकी मॉनिटरिंग जीपीएस से होती है। जीपीएस मॉनिटरिंग कर्मचारी भी मिले हुए थे। टैंकर मालिक जेठाराम उर्फ गणेशाराम गौतमसिंह इसे अपने वाहन स्कार्पियों, स्विफ्ट डिजायर में जीपीएस की पिन इंस्टालेशन करवा देते थे। धोरीमन्ना और मांगता के बीच टैंकरों को रोककर जीपीएस गाड़ियों में लगा देते। टैंकर काे 40-50 स्पीड को बढ़ाकर 70-80 की स्पीड से चलाते थे। 30-35 मिनट का अंतराल रखते थे। इस बीच टैंकर फैक्ट्री में खाली कर देते। फिर जीपीएस को टैंकर में लगाकर एमपीटी तक पहुंचाते थे। बाड़मेर में क्रूड आयल चोरी के मामले में हाइटेक तकनीक के इस्तेमाल से पुलिस भी हैरान है। आरोपियों ने जिस तरह से लंबे समय तक क्रूड चोरी की है,उसने सुरक्षा व्यवस्था की भी पोल खोलकर रख दी है।

क्रूड का काला कारोबार

खबरें और भी हैं...