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संस्था प्रधान शिक्षकों को दे सकेंगे 17 सीसीए नोटिस

5 वर्ष पहले
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मकसद : कामकाज में हो रही देरी को दूर करना

भास्करसंवाददाता | बालोतरा

जिलेके सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्य प्रधानाध्यापक भी अब अपने अधीनस्थों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेंगे। ऐसा पहली बार हो रहा है जब जिला शिक्षा अधिकारी, उपनिदेशक या अन्य उच्च अधिकारियों के अलावा संस्था प्रधानों को भी कार्रवाई करने के अधिकार दिए जा रहे हैं। इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने प्रमुख शासन सचिव को नियमों में बदलाव के लिए पत्र लिखा है। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग संस्था प्रधानों को कार्रवाई करने के अधिकार देगा। अधिकार मिलने के बाद प्रधानाचार्य और माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक अपने अधीनस्थ कार्यरत अराजपत्रित कार्मिकों के खिलाफ सीसीए नियम 17 में कार्रवाई करने की शक्तियों का उपयोग कर सकेंगे।

ऐसा करने के पीछे शिक्षा विभाग का मकसद काम काज में हो रही देरी को दूर कर समय पर काम पूरा करना है। इस अधिकार के प्रस्ताव को लेकर शिक्षक संगठनों में भी भय का माहौल पैदा हो गया है। शिक्षकों का कहना है कि इस अधिकार का संस्था प्रधान दुरुपयोग कर सकते हैं।

इस संबंध में उपनिदेशक माध्यमिक शिक्षा बंशीधर गुर्जर ने बताया कि उपनिदेशक डीईओ के पास काम अधिक होता है। इसलिए निदेशक ने शासन सचिव को इस तरह का प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव की स्वीकृति मिलने के बाद सभी संस्था प्रधान पॉवरफुल हो जाएंगे। अभी प्रस्ताव को स्वीकृति मिलना बाकी है।

निदेशक माध्यमिक शिक्षा ने सभी संस्था प्रधानों को यह अधिकार देने के लिए प्रमुख शासन सचिव को पत्र लिखा है। यह प्रस्ताव संभवतया इसी माह स्वीकृत हो जाएगा। उपनिदेशकों की बैठक में इस प्रस्ताव पर मंथन हो चुका है। हालांकि राजस्थान शिक्षा अधीनस्थ सेवा नियम 1971 के नियम दो के प्रावधानों के अनुसार तृतीय श्रेणी के सभी शिक्षकों, लिपिक, सहायक कर्मचारी के लिए जिला शिक्षा अधिकारी, द्वितीय श्रेणी के सभी शिक्षकों, लिपिक ग्रेड प्रथम कार्यालय सहायक के लिए उपनिदेशक को नियुक्त अधिकारों की शक्तियां दी गई है। लेकिन अधिकार मिलने के बाद यह शक्तियां संस्था प्रधानों को मिल जाएंगी। विभाग का मानना है कि विभाग के न्यून परीक्षा परिणाम सहित अन्य कारणों से अनेक विभागीय जांच प्रक्रियाधीन है। बकाया प्रकरणों की संख्या अधिक होने से कार्य समय पर नहीं हो पाता और ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो पाती है। ऐसे में यह अधिकार प्रधानाध्यापकों को दिए जाएंगे।

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