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संतों के संग से मन और बुद्धि शुद्ध होती है : महाराज

7 वर्ष पहले
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संतोंके संग से मन और बुद्धि शुद्ध होती है, जो जीव को महामानव बना देती है। अनीति अधर्म पर चलने वालों का अंत बुरा होता है। अनैतिक कार्याे से दूर रहना चाहिए। न्याय के मार्ग पर चलकर ही सच्चे सुख की प्राप्ति की जा सकती है। न्याय सत्य के मार्ग अथवा धर्म के आधार पर चलकर ही भगवान श्रीराम ने विजय प्राप्त की थी। ये विचार घांची समाज नवयुवक संस्थान के तत्वावधान में स्थानीय घांची समाज भवन में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान कथावाचक महामंडलेश्वर राघवदास महाराज ने व्यक्त किए। इस दौरान श्रीराम जन्मोत्सव का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा करते हुए श्रीराम के जयकारे लगाए।

महाराज ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आदर्शमय है। श्रीराम के जीवन से प्रत्येक मनुष्य को प्रेरणा लेनी चाहिए। सद्कर्म से ही मुक्ति संभव है। प्रत्येक मनुष्य को अपने किए कर्मांे का फल भोगना ही पड़ेगा। आत्मा का ज्ञान ही महाज्ञान है। भगवान श्रीराम जन्म पर भजनों की प्रस्तुति पर उत्साह से श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर जन्मोत्सव का आनंद उठाया। महाराज ने कहा कि इतिहास के पन्नों विश्व में भारत की भूमि को मर्यादित भूमि के रूप में जाना जाता है। भारतीय संस्कृति में भगवान श्रीराम ने इस महान कार्य को किया। जिससे उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के नाम से जाना जाता है। भगवान श्रीराम को सत्य, धर्म के रास्तों पर अनेकों कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंत में सत्य को विजय की प्राप्ति हुई। इस दौरान शंकरलाल परिहार, पारसमल भाटी, राणाराम परिहार, रणछोड़राम परिहार, अशोक साेलंकी, जोगाराम तोपड़ा, धनराज, चैलाराम, कांतिलाल गहलोत, गहलोत नवयुवक संस्थान अध्यक्ष महेश भाटी, चंपालाल, सोहनलाल, रामेश्वर राठौड़, पुखराज चौहान, नारायण भाटी, सूजाराम गहलोत, सुरेश भाटी, राणाराम गहलोत, मगराज गहलोत, अशोक परिहार, गौतम भाटी सहित समाज के बुजुर्ग, महिलाएं नवयुवक संस्थान के सदस्य मौजूद थे।

बालोतरा. श्रीरामकथा का श्रवण करते श्रद्धालु।