अलवर। करीब साढ़े तीन घंटे तक चली जनसुनवाई में फरियादियों से अधिक अफसरों की संख्या थी। जो फरियादी पहुंचे, उनमें से कुछ तो पहले भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए अफसरों जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन उनकी समस्या का निस्तारण नहीं हो रहा है।
डीआरडीए सभागार में गुरुवार को जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई जनसुनवाई में केवल 19 लोग ही शिकायत लेकर पहुंचे। कलेक्टर एमपी स्वामी ने कैरवावाल निवासी कमलादेवी की पीपीओ जारी होने के 3 माह बाद भी पेंशन नहीं मिलने पर एसडीओ अलवर को जांच कर पेंशन दिलाने के निर्देश दिए।
हरसौरा के दाताराम गुर्जर ने गोशाला की भूमि उसके आम रास्ते पर अतिक्रमण की शिकायत पर तहसीलदार बानसूर को अतिक्रमण हटवाने, कैरवा जाट के नानकचंद की परिवेदना पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के एडी को मुआवजा राशि दिलवाने के निर्देश दिए। बैठक में एडीएम प्रथम हरभान मीणा, यूआईटी सचिव महेन्द्र लोढ़ा, जिला परिषद के सीईओ राजेंद्रसिंह राठौड़, एडिशनल एसपी (ग्रामीण) राजेंद्र वर्मा, नगर परिषद आयुक्त शैफाली कुशवाह सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
पिछलीजनसुनवाई पर एक नजर
तारीख-11 दिसंबर 2014
कुल परिवेदनाएं आई-48
निस्तारण- 13 परिवेदनाओं का
नगर परिषद की बैठक में बिना बहस बजट पास करने के मामले में विपक्षी पार्षदों ने कलेक्टर से मुलाकात की। पार्षदों ने कहा कि सभापति ने एकतरफा निर्णय लेने के लिए पार्षदों की सुनी ही नहीं। यदि ऐसा ही करना था तो उनको बुलाया क्यों गया।
पार्षद नरेंद्र मीना, मुकेश सैनी, नारायण सांईवाल, कपिलराज, विक्रम यादव, निरंजन लाल सैनी, हुकुमचंद आदि ने बैठक को शून्य करार देने की मांग संबंधी ज्ञापन सौंपा।
हरजन सुनवाई में आता हूं, सुनता कोई नहीं
खुदनपुरी रोड निवासी रिटायर्ड शिक्षक भीमसिंह कलेक्टर के सामने अपनी बात कहते हुए आक्रोशित हो गए। जमीन पट्टे से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंचे 80 वर्षीय भीमसिंह ने रोष में कहा-मैं एक साल से हर जनसुनवाई में फरियाद लेकर आता हूं, लेकिन सुनता कोई नहीं है।
प्रशासन खुद ही गलत पट्टे जारी करता है, फिर पीड़ितों की सुनेगा कौन? उन्होंने कलेक्टर को बताया कि करीब 30 साल पहले कन्वर्जन राशि जमा कराने के बावजूद अभी तक समस्या का निराकरण नहीं हुआ है।
बुजुर्ग की बात सुनकर कलेक्टर ने दस्तावेज देखे और कहा- आपसे एक पत्र के जरिए जवाब मांगा था, अभी तक जवाब ही नहीं दिया तो आगे कार्रवाई कैसे होगी। इस पर फरियादी को गुस्सा गया और अधिकारियों को कोसते हुए वह बाहर चला गया।
मैं जिंदा हूं, बताओ इसका प्रमाण कैसे दूं
तिजारा फाटक निवासी बुजुर्ग महिला वैजयंती माला ईएसआई मेडिकल कार्ड नहीं बनने से परेशान हैं। फरियाद लेकर पहुंची और बताया कि कार्ड नहीं बन रहा। ईएसआई दफ्तर जाती हूं तो कहते हैं, कैसे मान लें कि आप जिंदा हैं।
वैजयंती ने अफसरों से पूछा-बताओ मै जिंदा हूं इसका प्रमाण कैसे दूं। नियमानुसार इसके लिए एक शपथपत्र देना होता है, अफसरों ने महिला को तहसील से शपथपत्र बनवाकर ईएसआई कार्यालय में जमा कराने की सलाह दी, जिस पर वे सहमत होकर लौट गई।
अजब राज है, मैं जमीन दान करना चाहता हूं लेकिन अधिकारी ले ही नहीं रहे
जनसुनवाईमें एक ऐसा मामला आया जिसे सुनकर सब चौंक गए। भनोखर निवासी बनवारीलाल मीना ने कलेक्टर को बताया कि भनोखर उप-तहसील भवन के लिए वे सड़क किनारे की अपनी जमीन दान कर सरकार को सौंपना चाहते हैं। आठ सरपंचों ने इसकी स्वीकृति भी दे दी है, मौका मुआयना हो चुका लेकिन पिछले डेढ़ वर्ष से उनको कोई जवाब नहीं मिल रहा।
कठूमर एसडीएम उत्तम सिंह मदेरणा के अनुसार, जमीन देने के लिए दो पार्टियां दबाव बना रही हैं। एक पक्ष कहता है यहां जमीन लो, दूसरा पक्ष दूसरी जगह के लिए कह रहा है। मदेरणा के अनुसार, ऐसा क्षेत्र विशेष की जमीन के दाम बढ़ाने के लिए हो रहा है। विवाद देखते हुए प्रशासन अब भनोखर के राजकीय सीनियर हायर सैकंडरी स्कूल के खेल मैदान की 14 बीघा जमीन में उप-तहसील बनाने का प्रस्ताव बनाने की तैयारी कर रहा है।
जनसुनवाई में आने वाले लोगों की संख्या कम थी। धीरे-धीरे एक-एक, दो-दो फरियादी आने के कारण अफसर भी बोर होते दिखे। बोरियत दूर करने के लिए नगर परिषद आयुक्त शैफाली कुशवाह काफी देर तक
फेसबुक अकाउंट खोलकर चैटिंग में व्यस्त दिखी। पीडब्ल्यूडी एक्सईएन संगीत अरोड़ा सहित कुछ अन्य अधिकारी
मोबाइल पर व्यस्त दिखे।
टाइम पास के लिए अफसर करते रहे फेसबुक चैटिंगअलवर. टाइम पास करना है तो वाट्सएप से बेहतर क्या, वाट्स एप पर आई पिक्चर देखते पीडब्ल्यूडी एक्सईएन संगीत अरोड़ा।