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बच्चों की सेहत की भी सुरक्षा नहीं

7 वर्ष पहले
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36 टीका एक्सप्रेस हैं संचालित

ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा संस्थानों से दूरस्थ गांवों में बच्चों को बीमारियों से सुरक्षा वाले टीके लगाने के लिए जिले में 36 टीका एक्सप्रेस संचालित हैं। लेकिन धरातल पर टीकाकरण के आंकड़े विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। करीब तीन-चार महीने पहले यहां 64 टीका एक्‍सप्रेस संचालित थी। लेकिन टीका एक्सप्रेस के सार्थक परिणाम सामने नहीं आए।

येहै टीकाकरण का शैड्यूल

>बच्चे के जन्म के 24 घंटे में बीसीजी, हैपेटाइटिस बी एवं पोलियो का टीकाकरण।

> डेढ़, ढाई और साढ़े तीन महीने में डीपीटी, हैपेटाइटिस बी पोलियो का टीकाकरण।

> नौ महीने में मीजल्स का टीका विटामिन की खुराक।

> 16 से 24 महीने में डीपीटी हैपेटाइटिस बी का बूस्टर टीका।

> पांच साल में डीपी, दस साल में पीटी एवं सोलह साल में पीटी का बूस्टर टीकाकरण।

मॉनिटरिंगही नहीं हो पाई

जिलेमें टीकाकरण की स्थिति रामभरोसे रही है। क्योंकि आरसीएचओ का पद रिक्त होने के कारण जिले में टीकाकरण की मॉनिटरिंग नहीं हो पाई है। जिससे ग्रामीण क्षेत्रों एएनएम ने टीकाकरण पर ध्यान नहीं दिया। सभी चौदह ब्लॉक में बीसीएमओ टीकाकरण को लेकर गंभीर नहीं हैं। टीकाकरण के हालात यही बताते हैं कि अभी तक ब्लॉक स्तर पर तो मॉनिटरिंग ही नहीं हुई है। यहां एक महीने पहले ही चिकित्सा विभाग ने आरसीएचओ पद पर डॉ. ओमप्रकाश मीणा को पदस्थापित किया है। इसके बाद मॉनिटरिंग शुरू हो पाई है।

कौनसे कितने लगे टीके

जिलेमें बीसीजी के 11686, डीपीटी-3 के 15935, पोलियो के 15754, मीजल्स के 17212 एवं हैपेटाइटिस बी का 15824 बच्चों को टीकाकरण किया गया।

भास्कर न्यूज | अलवर

स्टाफकम, ही टीकों की कमी। टीका एक्सप्रेस की रफ्तार भी थमी नहीं। कर्मचारियों की भी लंबी सूची। फिर भी टीकाकरण का कार्य सुस्त। जिले में टीकाकरण के हालात चौंकाने वाले हैं। बच्चों की सेहत से जुड़े टीकों के आंकड़े चिकित्सा विभाग की गंभीरता पर सवाल उठा रहे हैं। तमाम साधन, सुविधा और व्यवस्थाओं के बाद भी विभाग करीब छह महीने में मात्र 19.74 फीसदी टीकाकरण कर पाया है। जबकि पूरे साल में 83018 बच्चों को टीके लगाने का लक्ष्य है। अब तक आधे से अधिक बच्चों को टीकाकरण होना था। लेकिन ब्लॉक स्तर पर मॉनिटरिंग के अभाव में लक्ष्य पर गौर करना ही मुनासिब नहीं समझा।

टीकाकरणमें लापरवाही बर्द