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बजट नहीं मिला तो आदेश रद्दी की टोकरी में
बीडीओ-एईएन बोले, कहां से कराएं वीडियोग्राफी
कठूमर में सोशल ऑडिट शुरू ही नहीं हुई
जिलेकी कठूमर पंचायत समिति में तो सोशल ऑडिट अभी शुरू ही नहीं हो पाई है। प्रोग्राम अधिकारी संजीव कुमार के अनुसार पर्याप्त ग्राम संसाधन व्यक्तियों की नियुक्तियां नहीं होने के कारण अभी ऑडिट शुरू नहीं कराई गई है। गौरतलब है कि सरकार ने ब्लाॅक स्तर पर ब्लाॅक संसाधन व्यक्ति और ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम संसाधन व्यक्तियों की नियुक्तियां की थी, जिन्हें ऑडिट के बाद प्रतिदिन के हिसाब से क्रमश: 325 रुपए और 225 रुपए दिए जाएंगे।
^जिलेमे सोशल ऑडिट की वीडियोग्राफी नहीं हो रही, मैं गुरुवार को भूगोर ग्राम पंचायत में था वहां भी वीडियोग्राफी नहीं हुई, बजट अभाव के कारण ऐसा नहीं हो रहा। जीएलआर्य, नोडलअधिकारी, सोशल ऑडिट
आदेशों की गफलत, खर्चे पर पाबंदी
ग्रामीणविकास एवं पंचायतीराज विभाग की ओर से पारदर्शिता लाने के मकसद से सोशल ऑडिट की वीडियोग्राफी कराने संबंधी आदेश जारी हुए थे। सरकार की मंशा थी कि वीडियोग्राफी होने से विकास कामों से जुड़ी शिकायतों के उजागर होने के बाद जांच के दौरान मिलीभगत नहीं हो पाएगी। वीडियोग्राफी के दौरान एक बार शिकायतकर्ता ने अपने बयान दर्ज करा दिए तो बाद में वह किसी के प्रभाव से बदल भी नहीं पाएगा। साथ ही ऑडिट सभा का पूरा रिकाॅर्ड मय वीडियो सीडी के मंत्रालय भी पहुंच जाएगा। शिकायतों की गंभीरता से सीधे सरकार भी अवगत हो पाएगी। शेष|14 पर
इनआदेशों के बावजूद सरकार ने वीडियोग्राफी के लिए अलग से कोई बजट नहीं दिया। अब जब भी अधिकारी विकास अधिकारियों से वीडियोग्राफी की पूछते हैं तो वे प्रशासनिक मद से खर्च नहीं करने की पाबंदी और नए बजट अभाव की बात कहकर असमर्थता जता देते हैं।
मंशा हो तो मोबाइल से भी हो सकता है समाधान- पंचायत समितियों में वीडियोग्राफी नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद नरेगा शाखा से विकास अधिकारियों को हर हाल में वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। नरेगा प्रभारी अमरचंद मीना का कहना है कि यदि विकास अधिकारी चाहें तो मोबाइल से भी वीडियोग्राफी कराई जा सकती है। थानागाजी बीडीओ कांता जांगिड़ आगामी चरणों की वीडियोग्राफी मोबाइल से कराने की बात कह रही हैं।
देवेंद्र यादव | अलवर
सोशलऑडिट की वीडियोग्राफी के आदेश के बावजूद ज