पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • बजरी बेचने के लिए यूआईटी ने मुफ्त में दे रखी है जमीन

बजरी बेचने के लिए यूआईटी ने मुफ्त में दे रखी है जमीन

5 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
वैध-अवैध की खींचतान ने बढ़ाए दाम

जिलेमें वैध-अवैध की खींचतान के कारण सवाईमाधोपुर बनास क्षेत्र से आने वाली बजरी के दामों में बढ़ोतरी हुई है। बजरी के अवैध खनन को पूरी तरह से वैध बनाने का काम यहां होता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर बजरी व्यवसाय से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि हमें दशहरा मैदान पर खड़े होने के लिए सुविधा शुल्क देना पड़ता है।

कोर्टसख्त, ट्रैक्टर में नहीं हो रहा बजरी का परिवहन

बजरीके ट्रैक्टर में परिवहन के कारण भी उसकी कीमत बढ़ रही है। हालांकि इस संबंध में कोर्ट ने साफ किया है कि ट्रैक्टर ट्राली का उपयोग केवल कृषि कार्यों के लिए ही किया जा सकता है साथ ही परिवहन विभाग को आदेश दिए हैं कि बजरी का परिवहन करने वाले ऐसे ट्रैक्टर-ट्राॅली को जब्त किया जाए और बिना कोर्ट की अनुमति के नहीं छोड़ा जाए।

^यूआईटी की जमीन पर यदि इस तरह की कोई गतिविधि हो रही है तो गंभीर प्रकरण है। मैं जांच करवाता हूं और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। -हिमांशुगुप्ता, सचिव यूआईटी

भास्कर संवाददाता | अलवर

अलवरमें सवाईमाधोपुर, टोंक बानसूर से आने वाली अवैध खनन की बजरी को वैध बनाने में प्रशासन की भी मौन सहमति है। शहर के दशहरा मैदान पर लगे बजरी के ढेर को देखकर ऐसा ही लगता है। इस जगह का एक दिन का व्यावसायिक किराया 15 से 20 हजार रुपए है। जबकि नगर विकास न्यास ने यह जमीन मुफ्त में दे रखी है। यहां लंबे समय से बजरी का व्यवसाय चल रहा है। खुद सरकार के नुमाइंदे बजरी के इस खेल में प्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। बड़ी बात यह भी है आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम में बजरी के शामिल होने के बावजूद बजरी की कालाबाजारी को रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई के नाम पर अधिकारियों ने महज नोटिस जारी किए हैं। शहर के दशहरा मैदान पर बिकने वाली बजरी का तो किसी के पास हिसाब है और ही इस बजरी के वैध और अवैध होने के प्रमाण। ऐसे में बजरी माफिया पूरी तरह से सक्रिय है और मनमर्जी करता है। ग्राहकों की मजबूरी यह रहती है कि बजरी लेकर आने वाले मालिकों का पूल इस तरह का होता है कि उसे भेदना बेहद मुश्किल है।

भास्कर में 5 फरवरी को प्रकाशित खबर।

अलवर. दशहरा मैदान में लगे बजरी के ढेर, इस बजरी के वैध-अवैध होने का प्रमाण किसी के पास नहीं है।

खबरें और भी हैं...