रामलीला में दशरथ मरण, भरत मिलाप का मंचन
बारां. शहरके रामलीला मैदान में श्री महावीर कला मंडल संस्थान की ओर से आयोजित रामलीला में रविवार को केवट प्रसंग, दशरथ मरण, भरत मिलाप की लीला का मंचन किया गया।
श्री राम चरित मानस के इस मार्मिक प्रसंग में श्रीराम सीता लक्ष्मण निषादराज के साथ गंगातट पर पहुंचते है, जहां केवट उन्हें नाव में गंगा पार कराने से यह कहते हुए मना कर दिया कि आपकी चरणरज से जब शिला ही नारी बन सकती है तो प्रभू मेरी तो काठ की नांव है। यदि यह नहीं रही तो परिवार की रोजी-रोटी ही चली जाएगी। यदि आप मुझे पैर पखारने की आज्ञा है तो मैं गंगा पार करवा दूं। श्रीराम की आज्ञा से केवट उनके पैर धोकर चरणामृत लेता है और गंगा पार करवाता है। उधर, राम वियोग में राजा दशरथ अयोध्या में प्राण त्याग देते हैं। तब भरत शत्रुध्न नाना के घर से वहां आते है और सारा वृतांत सुनकर कैकई मंथरा को बहुत भला बुरा कहते हैं।
राजा दशरथ के क्रियाकर्म के बाद भरत कुटुंब सहित राम को मनाने चित्रकूट जाते हैं, जहां श्रीराम चरण पादुका देकर उन्हें वापस भेज देते हैं तथा पितृ आज्ञा की पालना की सीख देते है। संस्थान के संयोजक श्यामसुंदर बंसल ने बताया कि मंगलवार को लंका दहन की लीला का मंचन किया जाएगा।