अब गेहूं में भी करनाल बंट रोग
बारां. गेहूंकी फसल में करनाल बंट रोग नुकसान पहुंचा रहा है।
भास्कर न्यूज. बारां
मौसमखराब होने से जिले में फसलों में व्यापक नुकसान की बात सामने आई। चौंकाने वाली बात यह है कि गेहूं की फसल में करनाल बंट रोग की आशंका में किसान जिस दवा का छिड़काव कर रहे हैं, उससे कैंसर की बीमारी होती है। यह रिपोर्ट कृषि वैज्ञानिकों के सर्वे जांच में सामने आई है।
कृषि विभाग के सर्वे के मुताबिक बीज उत्पादन कार्यक्रम के तहत तैयार करने वाले गेहूं में करनाल बंट रोग से प्रभावित बीज लेना भी प्रतिबंधित कर दिया। केवीके के वैज्ञानिकों ने बताया कि करनाल बंट फंगस से होने वाला रोग है। इससे गेहूं का बीज प्रभावित होता है। ऐसे में किसानों को किसी भी प्रकार की दवा छिड़कने से विभाग ने मना कर दिया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि धनिया में लगने वाले लौंगिया रोग भी कैंसर की तरह है। इस पर छिड़कते ही यह कम हो जाता है। पूरी तरह नष्ट नहीं हाेता। करनालबंट के यह हैं लक्षण: गेहूंमें लगने वाले करनाल बंट रोग के कारण गेहूं के बीज का मुंह काला हो जाता है। इससे इसकी क्वालिटी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह रोग पंजाब में देखा गया था। इसके राजस्थान में भी आने की आशंका में किसान बचाव के लिए दवा छिड़क रहे हैं। इससे लोगों के शरीर में कैंसर होने की आशंका रहती है।
90फीसदी खेतों में धनिया लौंगिया से प्रभावित: जिलेमें धनिया की फसल लगभग 56 हजार हैक्टेयर में बोई गई है। कृषि विभाग के अनुसार धनिए के 90 फीसदी खेतों में लौंगिया रोग देखा गया। विभागीय जानकारी के अनुसार किसी खेत में 10 तो किसी में 50 प्रतिशत तक नुकसान देखा गया है। विभाग के अधिकारी के मुताबिक लौंगिया रोग से 25 फीसदी नुकसान हो सकता है।
200किसानों को दी थी धनिए की अजमेर-1 किस्म: अंताकृषि विज्ञान केंद्र के मुख्य समन्वयक एवं वैज्ञानिक डॉ. आईएन गुप्ता ने बताया कि जिले में केवीके की ओर से 200 किसानों को अजमेर-1 किस्म का धनिया दिया गया था। इस किस्म में लौंगिया रोग नहीं देखने में आया। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि लौंगिया रोग लगने पर गलत तरीके से दवा का छिड़काव नहीं करें। जितनी मात्रा बताई जाए, उतनी ही मात्रा में दवा का छिड़काव करें और गलत दवाई नहीं डालें।
यहहै जिले में बुवाई का रकबा
धनिया56 हजार
सरसों 90 हजार
गेहूं 1.50 लाख
लहसुन 25 हजार
(रकबा हैक्टेयर में)
इनकाकहना है
^गेहूंमें करनाल बंट की आशंका में कुछ किसान दवा का छिड़काव कर रहे हैं। इस दवा से प्रभावित गेहूं के खाने और बुवाई करने से कैंसर के जीवाणु फैलने की आशंका रहती है। इसलिए किसानों को गेहूं में किसी भी प्रकार की दवा छिड़कने से मना किया जा रहा है। धनिया में जिस खेत में लौंगिया रोग लगा है, उस खेत में किसान दुबारा धनिया नहीं बोएं और फसल चक्र अपनाएं। लौंगिया से प्रभावित धनिया की दुबारा बुवाई नहीं करें। -डॉ.आईएनगुप्ता, मुख्य वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, अंता
इस मौसम में दवा छिड़कना जरूरी नहीं
^समाचारपत्रों में करनाल बंट रोग के प्रकोप की जानकारी आते ही किसान दुकानों से प्रोपोनॉजोल दवा लेकर छिड़क रहे हैं। जिले में कुछ स्थानों पर करनाल बंट रोग सामने आया है। इस मौसम में यह रोग गेहूं की फसल में आता है। उन्होंने बताया कि दवा नहीं छिड़कने से कोई नुकसान नहीं है। बल्कि दवा से लोगों को कैंसर होने की आशंका रहती है। -डॉ.गुप्ता, मुख्य वैज्ञानिक