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पारदर्शिता के दावे, एक महीने बाद भी अधर में आदेश
बारां|चिकित्सा एवंस्वास्थ्य विभाग ने पारदर्शिता के लिए कड़े नियम बना दिए, लेकिन अधिकारी ही उनकी पालना नहीं कर रहे हैं। नियमों की अनदेखी कर पहले तो गबन के आरोपी डॉक्टर को जिला अस्पताल में पीएमओ बना दिया। मामला सामने आने पर विभागीय अधिकारियों ने उसे हटाने के निर्देश दिए। करीब एक महीना गुजरने पर भी आदेशों की पालना नहीं हो रही है।
जिला अस्पताल में कार्यरत डॉ. एलआर लोहिया को 14 सितंबर को विभागीय अधिकारियों ने पीएमओ बनाने के आदेश दिए थे। डॉ. लोहिया पर 14 साल पहले फूलियाकलां पीएचसी पर कार्यरत रहने के दौरान 9 लाख 42 हजार रुपए के गबन के आरोप हैं। चिकित्सा विभाग के आंतरिक जांच दल ने रिपोर्ट में डॉ. लोहिया को गबन का दोषी माना। इसके बाद से डॉ. लोहिया को राशि वसूल करने के लिए पत्र भेजे जा रहे हैं। उधर, चिकित्सा विभाग के संयुक्त शासन सचिव महावीर सिंह ने 10 नवंबर को डॉ. केएल मीणा को पीएमओ बनाने के आदेश किए थे। इसमें वित्तीय शक्तियां भी डॉ. मीणा को हस्तांतरित की गई थी। आदेश आने के एक महीने बाद भी चार्ज का हस्तांतरित नहीं हुआ है। आगामी 31 दिसंबर को डॉ. लोहिया की सेवानिवृत्ति है। ऐसे में वरिष्ठतम होने पर से डॉ. मीणा को ही चार्ज दिया जाएगा।
नियमोंकी हुई अनदेखी:डॉ. लोहियाको पीएमओ बनाने में भी नियमों की अनदेखी की गई। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की स्क्रीनिंग कमेटी के नियमों के अनुसार पीएमओ और सीएमएचओ बनने वाले डॉक्टर को सेवानिवृत्ति में तीन साल का सेवाकाल होना जरूरी है। डॉक्टर के खिलाफ गबन, वित्तीय अनियमितता के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित नहीं होनी चाहिए।
पीएमओबता रहे खुद को निर्दोष
जिलाअस्पताल पीएमओ डॉ. एलआर लोहिया ने बताया कि पीएचसी फूलिया कलां में मेरे चार्ज देने के 5-10 साल बाद ऑडिट की गई थी। उस समय पदस्थ बाबू की भी ऑडिट से पहले मृत्यु हो गई थी। ऐसे में रिकॉर्ड नहीं मिला। प्रकरण में तीन डॉक्टरों सहित 8-9 आरोपी बनाए गए हैं। इसके खिलाफ अपील कर रखी है। बचाव पक्ष को सूने बिना ऑडिट की गई थी। आरोप तो कोई भी लगा सकता है। कानूनी प्रक्रिया के तहत यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। इससे पहले भी तीन जगह अस्पताल प्रभारी रह चुका हूं। मैं मामले में पूरी तरह निर्दोष हूं। यह सिद्ध कर दूंगा। ऑडिट पार्टी ने बुलाया भी नहीं। चार्ज देते समय नो-ड्यूज लिया था।
^डॉ. केएल मीणा को चार्