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महाशिवरात्रि पर फलदायी होगी शिवशंकर की पूजा

6 वर्ष पहले
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महाशिवरात्रिका महापर्व इस बार 17 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन ज्योतिषविद् सुख-समृद्धि का विशेष योग बता रहे हैं। 17 फरवरी को मंगलवार होने की वजह से इसका विशेष महत्व भी बताया जा रहा है। ज्योतिषों के अनुसार मंगलवार को रहे महाशिवरात्रि का महापर्व मंगलकारी तो है ही इस दिन गुरु और शुक्र का उच्च राशि में होना शिवभक्तों के लिए विशेष फल देने वाला रहेगा। पंडित ओमप्रकाश गौतम के अनुसार उदयकाल में त्रयोदशी तिथि दोपहर 12.36 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुदर्शी शुरू होगी। अगले दिन बुधवार को चतुदर्शी और अमावस दोनों रहेंगी। इस कारण मंगलवार को एक ही दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।

निशीथकाल में चतुर्दशी का फल श्रेष्ठ:पंडित गौतमने बताया कि शास्त्रों के मुताबिक निशीथ काल में चतुदर्शी श्रेष्ठ मानी गई है। इसलिए 17 फरवरी को आधी रात 12.15 से 1.07 बजे तक निशीथ काल रहेगा। इस दौरान पूजा-अर्चना सर्वश्रेष्ठ उत्तम मानी गई है। यही नहीं निशीथ काल में बृहस्पति की पूर्ण दृष्टि और शुक्र की द्वि पाद दृष्टि रहेगी।

चारप्रहर चलेगी शिवजी की पूजा:भगवान भोलेनाथकी पूजा के लिए 4 प्रहर में पूजा श्रेष्ठ फल दायी और मनोकामना पूरी करने वाली मानी गई है। चार प्रहर की पूजा के लिए यह रहेगा समय: प्रथम प्रहर शाम 6.16 बजे से। दूसरा प्रहर रात 9.29 बजे से। तीसरा प्रहर मध्य रात 12.37 बजे से। चतुर्थ प्रहर अर्द्धरात्रि के बाद3.54 बजे से रहेगा।

जन्मोत्सव में झूमे श्रद्धालु

देवरी.कस्बेकेदेवधाम मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा के दौरान रविवार को कथा प्रसंग में रामजन्मोत्सव कृष्ण जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा वाचक आचार्य पंडित गोपालकृष्ण शास्त्री ने बताया कि भगवान कृष्ण का अवतार पृथ्वी पर कंस के बढ़ते अत्याचार एवं अधर्म को नष्ट करने के लिए हुआ था। उन्होंने कष्ण जन्मोत्सव प्रसंग में मांगलिक गीत गाए। कथा आयोजक नरोत्तम शर्मा ने बताया कि कथा की पूर्णाहुति भंडारा 12 फरवरी को होगा।

देवरी. कथा में कृष्ण जन्मोत्सव मनाया।

बारां. शहर के कोटा रोड स्थित मनिहारा महादेव मंदिर।