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अंधेरे में इलाज, वार्डों में धुएं से घुटता रहा दम

7 वर्ष पहले
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स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही मरीजों पर पड़ सकती है भारी

उमसअंधेरे के बीच उपचार, जलते संक्रामक कचरे का धुंआ और बिना ढक्कन के डस्टबिनों से आती बदबू से मरीज तीमारदार परेशान हो रहे हैं। जयपुर से पहुंचे अधिकारियों के निर्देशों के बाद भी हालातों में अपेक्षित बदलाव नहीं आया है। हालांकि रंगरोगन, मरम्मत के कार्य जरूर हो रहे हैं।

शहर समेत जिलेभर से लोग जिला अस्पताल में उपचार कराने पहुंचते हैं, लेकिन यहां की स्थिति बदहाल होने से मरीजों तीमारदारों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में संक्रामक कचरे के निस्तारण को लेकर गंभीरता नहीं बरती जा रही है। अस्पताल के वार्डों में बिना ढक्कन के डस्टबिन रखे हैं। वहीं अस्पताल परिसर में संक्रामक कचरा जलाया जा रहा है। इसका धुंआ वार्डों में घुसकर मरीजों तीमारदारों को बेहाल कर रहा है। इसके अलावा बिजली गुल होने पर अंधेरे में उपचार करने की मजबूरी बनी हुई है। पिछले दिनों चिकित्सा विभाग के निदेशक बीआर मीणा, नेशनल हेल्थ मिशन के अतिरिक्त निदेशक नीरज के पवन, ग्रामीण स्वास्थ्य के अतिरिक्त निदेशक डॉ. आरएस छीपी आदि ने जिला अस्पताल का निरीक्षण कर सुधार के निर्देश दिए थे। इसके बाद रंगरोगन मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं।

बारां. जिला अस्पताल में दुर्घटना के बाद दो डॉक्टरों को उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। बिजली गुल होने से टॉर्च की रोशनी में डॉक्टर का इलाज किया गया।

बारां. महिला वार्ड में खुला रखा डस्टबिन।

बारां. अस्पताल परिसर में ही कचरे को जला रहे हैं