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मौका नहीं मिला, बढ़ गई खरपतवार, पौधे रह गए छोटे
बारां| जिलेमें फसलों की स्थिति बड़ी विचित्र हो गई है। पहले बारिश लेट हुई तो बुवाई देरी से हो पाई। बाद में लगातार बारिश ने खरपतवार निकालने का मौका ही नहीं दिया। नतीजा यह रहा कि खरपतवार बढ़ जाने से उस पर दवा का असर भी नहीं हो रहा और किसानों को मजदूर नहीं मिल रहे। ऐसे में सोयाबीन अन्य फसलों के पौधे छोटे रह गए। इससे फसल में नुकसान की आशंका है।
कृषि उपनिदेशक डॉ. आरबी सिंह ने बताया कि इस बार खेतों में खरपतवार अिधक होने से पौधों को बराबर बढ़वार नहीं मिल पाई। जिस अवस्था में इसे दवा छिड़ककर नष्ट किया जा सकता था, उस दौरान लगातार बारिश होने के कारण इसका उपयोग किसान नहीं कर पाए। जब तक बारिश रुकी, यह घास बड़ा रूप अख्तियार कर चुकी थी। इसे मजदूरों से ही निकलवाया जा सकता था, लेकिन मजदूरों का टोटा होने के कारण किसानों के सामने समस्या खड़ी हुई।
ऐसे में फसलों की बढ़वार बुरी तरह प्रभावित हुई। किसानों को डॉ.सिंह ने सलाह दी है कि खरपतवार का निस्तारण समय पर अब भी कर लें तो स्थिति में थोड़ा सुधार हो सकता है।
किसान खुद मान रहे हैं कि उपज होगी कम
किसानोंने बताया कि इस बार मानसून की दगाबाजी के कारण काफी नुकसान उठाना पड़ा है। बारिश देरी से आने के कारण बुवाई देरी से हुई और फिर लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी भर जाने से फसलें डूबी रहीं। ऐसे में अब जो स्थिति है। उससे एक बीघा में सोयाबीन का एक बोरी ही उत्पादन होने की उम्मीद है। इससे फसल की लागत ही नहीं निकल पाएगी। किसान नेता सत्यनारायणसिंह, छीतरसिंह हाड़ा और शंकरलाल नागर आिद ने बताया कि सोयाबीन मूंग, उड़द और अन्य फसलों का उत्पादन कम हो सकता है।
रबीसीजन से बंधी है आस
किसानोंको आगामी रबी सीजन की फसलों सरसों, चना और तिलहन जैसी फसलों से उम्मीद है। शुक्रवार को भूमि विकास बैंक के सालाना साधारण सभा में आए किसानों ने बाबूलाल नागर के नेतृत्व में उपनिदेशक कृषि डॉ. आरबी सिंह से इस मुद्दे पर सवाल-जवाब किए। उन्होंने बताया कि खेतों में दवा का असर नहीं हो रहा है। डॉ.सिंह ने कहा कि अधिक मात्रा में दवा का उपयोग करने से कीट प्रकोप की आशंका बढ़ जाती है। शेष|12पर
उत्पादन घटने की आशंका, किसान पसोपेश में