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सुल्तानपुर के जंगल में पहुंची बाघिन टी-35

7 वर्ष पहले
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बारां|करीब पांचसाल पहले रणथंभौर अभयारण्य से निकली बाघिन टी-35 कालीसिंध की कराइयों में कोटा और बारां जिले की सीमा में मूवमेंट कर रही है। पिछले दिनों से जिले के अंता क्षेत्र में आई बाघिन मंगलवार को वापस कोटा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र में प्रवेश कर गई।

वन विभाग अधिकारियों के अनुसार रणथंभौर अभ्यारण्य से बाघिन टी-35 पलायन कर गई थी। जिले में 16 जनवरी 2010 से इस बाघिन का मूवमेंट देखा जा रहा है। बाघिन को विचरण के लिए कालीसिंध नदी की कराइयां मुफीद बनी हुई हैं। यह कोटा जिले के सुल्तानपुर क्षेत्र बारां में अंता तहसील क्षेत्र के पाटूंदा, पलायथा, ढीबरी के आसपास विचरण कर रही है। इस महीने पांच दिसंबर को पलायथा के गणेश मंदिर के जंगल में बाघिन देखी गई थी। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर पगमार्क लिए और बाघिन के क्षेत्र में होने की पुष्टि की। इसके बाद वन विभाग की टीम बाघिन के मूवमेंट पर नजर बनाए हुई थी। इस दौरान बाघिन के पगमार्क पलायथा पाटूंदा के जंगल से लिए गए। बाघिन पहुंचने की खबर से ग्रामीण भयभीत थे। इसको देखते हुए अंता रेंजर ओमप्रकाश वर्मा ने विभाग के इकरामुद्दीन के नेतृत्व में बाघिन की निगरानी के लिए टीम बनाई थी। टीम प्रभारी इकरामुद्दीन ने बताया कि मंगलवार को बाघिन पाटूंदा से ढीबरी होते हुए कालीसिंध नदी को पार कर कोटा जिले में सुल्तानपुर के जंगल में प्रवेश कर गई है।

आजआएगी भेडिया को पकड़ने स्पेशल टीम:कुंजेड़.लगभग दसदिन से कस्बे में भेड़िए सक्रिय होने से लोंगों में दहशत बना हुआ है। भेड़िए को पकड़ने के लिए बुधवार को जयपुर से टीम रवाना होगी। िपछले आछ दिनों से कुंजेड में गश्त कर रहे फोरेस्टर बृजमोहन गुर्जर उग्रसेन मीणा ने बताया कि भेडिया के आतंक से किसानों में दहशत है। किसान रात में खेतों पर नहीं जा रहे हैं। मंगलवार सुबह भी लेखराज के खेत में भेडिए के पगमार्क दिखाई दिए। उन्होंने जयपुर की टीम को सूचित कर दिया है। टीम बुधवार को जयपुर से रवाना होगी।

पांच साल पहले रणथंभौर अभयारण्य से आई थी बाघिन