- Hindi News
- कीमत तय नहीं होने से धान के सही मूल्य से वंचित हैं किसान
कीमत तय नहीं होने से धान के सही मूल्य से वंचित हैं किसान
सरकारकी ओर से चावल के निर्यात को बंद करने के बाद धान उत्पादकों को रही परेशानी को लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए मंगलवार को बरूनी में धान उत्पादक किसानों की बैठक हुई।
इसकी अध्यक्षता किसान संघ के विभाग प्रचार प्रमुख सत्यनारायण सिंह ने की। इस दौरान सिंह ने किसानों से कहा कि पूरे जिले में सालों से सबसे अधिक धान का उत्पादन किशनगंज क्षेत्र में होता है, लेकिन अन्य सालों की अपेक्षा इस साल धान के रकबे में बढ़ोतरी हुई और राज्य सरकार की ओर से कीमत तय नहीं होने के कारण किसानों का धान का उचित दाम नहीं मिल रहा है, जबकि पिछले साल धान की बाजार कीमत लगभग 3500 रुपए थी, जो इस बार घटकर 1200-1500 रह गई।
इसके चलते किसान धान की फसल को बेच नहीं पा रहे है और किसानों ने घरों में ही घान की फसल का स्टॉक कर रखा है। इसके लिए क्षेत्र के सांसद विधायक भी जिम्मेदार है। यह सरकार के सामने किसानों की बात को नहीं रखते है। इसके चलते तो किसानों को यूरीया मिल रहा है ही फसलों का उचित दाम। इस दौरान धान की कीमतें बढा़ने यूरिया खाद की कमी को पूरा करने के लिए 12 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन किया जाएगा। इसके लिए किसान कृषि उपजमंडी मे एकत्रित होंगे। इससे पहले फतेहपुर केलवाडा़ में भी धान उत्पादक किसानों की बैठक का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान किसान संघ के जिला उपाध्यक्ष जगदीश िसंह अटवाल, मंजितसिंह, गुरदीपसिंह, केवल सुमन, प्रतापचंद्र शर्मा, श्रवणसिंह, भूपेंद्र सिंह, घनश्याम मीणा, लालचंद्र कुशवाह, रमेशचंद्र मीणा आदि मौजूद थे।
व्यवस्थामें सुधार के लिए दी आंदोलन की चेतावनी:छीपाबड़ौद. कस्बेमें सोमवार को खाद के लिए गांवों से आए महिला-पुरुषों के साथ पुलिस की ओर से की गई कार्यवाही की ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने निंदा की है। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष बाबूलाल टांटू ने बताया कि किसान पिछले एक माह से खाद की समस्या को लेकर परेशान हैं। जबकि कुछ विक्रेता खाद की कालाबाजारी कर पांच सौ रुपए प्रति कट्टे के हिसाब बेच रहे हैं। इसकी प्रशासन एवं कृषि अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद भी कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। क्षेत्र के किसान खाद के लिए पिछले एक माह से लगातार अधिकारियों एवं खाद विक्रेताओं के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें खाद उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। खाद के लिए खेल मैदान में तड़के 5 ब