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सैंपल की रिपोर्ट आई नहीं

7 वर्ष पहले
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नाहरगढ़| कस्बेसहित क्षेत्र के किसान धनिए की फसल में रोग लगने से चिंतित हैं। चार दिसंबर को कृषि विभाग की कोटा से आई टीम प्रभावित फसल के सैंपल लेकर गई थी। इसकी रिपोर्ट एक सप्ताह बाद भी नहीं आई है। ऐसे किसानों में असमंजस बना हुआ है कि फसल के बचाव के लिए कौनसी दवा का उपयोग करें। कई किसानों की फसल उनकी आंखों के सामने ही बर्बाद हो रही है।क्षेत्र में किसानों ने धनिए की बुवाई की थी। कुछ दिन बाद ही फसल पीली पड़कर सूखने लगी थी।

किसान संघ के मंजीत सिह, खंड अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण नागर, देवकिशन नागर, जुगलकिशोर मंगल, धृतपाल सिंह, भगवानलाल नागर आदि ने बताया कि फसल रोग लगने के समय से ही किसान परेशान हैं। किसानों की सूचना पर चार दिसंबर को कोटा कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक सुरेंद्र कुमार जैन, अंता केवीके कीट वैज्ञानिक टीसी वर्मा, कोटा पैथौलोजी एसोसिएट प्रोफेसर एके जैन, बूंदी कीट वैज्ञानिक डॉ. दिनेश सिंह, सहायक प्रोफेसर कीट वैज्ञानिक बीके पाटीदार सहित बारां सहायक निदेशक कन्हैयालाल मीणा, कृषि अधिकारी राधाकृष्ण शर्मा आदि ने धनिए की फसल का अवलोकन किया था। कृषि विशेषज्ञों ने खेतों की मिट्टी, रोगग्रस्त फसल के सेंपल लिए थे। इनकी लैब में जांच कर दो-तीन दिन में रिपोर्ट देनी थी। कृषि पर्यवेक्षक हरीशचंद्र हाड़ा ने बताया कि अभी निर्देश नहीं मिले हैं।

क्षेत्र में अज्ञात बीमारी से सूख रही है धनिए की फसल